Indian Parliament Book Row: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब को लेकर संसद में चल रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने 40 किताबों की एक सूची साझा की है और दावा किया है कि ये किताबें भारत का “असली इतिहास” बताती हैं और कांग्रेस के पुराने शासन से जुड़े कई विवादों को सामने लाती हैं।
आपातकाल और वंशवादी राजनीति पर बहस
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन 40 किताबों की सूची जारी की। उनके अनुसार, इन किताबों में भारत के ऐतिहासिक घटनाक्रम, 1975 से 1977 के बीच लगे आपातकाल का दौर, वंशवादी राजनीति की आलोचना और कांग्रेस शासन से जुड़े कई अहम पहलुओं का जिक्र है। उन्होंने कहा कि ये किताबें कांग्रेस सरकारों के विवादित पक्षों को उजागर करती हैं।

भाजपा सांसद ने ‘एक्स’ पर 40 अलग-अलग पोस्ट किए। हर पोस्ट में एक किताब का नाम, उसके लेखक का विवरण और उसका संक्षिप्त सार शामिल था। निशिकांत दुबे का कहना है कि अप्रमाणित या अपुष्ट जानकारी पर बहस करने के बजाय संसद को उन किताबों पर चर्चा करनी चाहिए, जो पहले से प्रकाशित हैं और आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं। उनके मुताबिक, ये किताबें नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस सरकारों के वास्तविक इतिहास को सामने रखती हैं।
Indian Parliament Book Row: राहुल गांधी के दावों पर सत्ता पक्ष का विरोध
यह पूरा मामला उस समय और गंभीर हो गया जब सप्ताह की शुरुआत में संसद में तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साल 2020 के भारत-चीन गतिरोध का मुद्दा उठाया था। उन्होंने एक मैगजीन में छपे लेख का हवाला दिया और दावा किया कि उसमें पूर्व सेना प्रमुख की एक “अप्रकाशित किताब” का उल्लेख किया गया है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि उस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से जुड़ी बातें भी लिखी गई हैं। इन दावों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने मांग की कि राहुल गांधी संसदीय नियमों का पालन करें और सदन में केवल प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोतों का ही हवाला दें।

संसद में किताबें पढ़े जाने पर हंगामा
विवाद उस समय और बढ़ गया जब राहुल गांधी बुधवार को एमएम नरवणे की किताब संसद परिसर में लेकर पहुंचे और मीडिया के सामने उसे दिखाया। इसके बाद निशिकांत दुबे भी कई किताबें लोकसभा में लेकर आए और कार्यवाही के दौरान उनमें से कुछ अंश पढ़कर सुनाए। भाजपा सांसद द्वारा सदन में किताबों के अंश पढ़े जाने पर विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई और हंगामा किया।
निशिकांत दुबे ने यह भी कहा कि जिन 40 किताबों का उन्होंने जिक्र किया है, वे उपलब्ध सामग्री का केवल एक छोटा हिस्सा हैं। उनका आरोप है कि कम से कम 150 से ज्यादा ऐसी किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें नेहरू-गांधी परिवार से जुड़े कथित धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और अनैतिक संबंधों के बारे में खुलासे किए गए हैं।







