Iran crisis: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बावजूद भारत सरकार ने किसानों के लिए राहत भरी खबर दी है। जून से शुरू हो रहे खरीफ सीजन में देश भर में जरूरत के मुताबिक उर्वरक का स्टॉक पर्याप्त है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च, 2026 तक देश में 62 लाख टन यूरिया उपलब्ध था, जो पिछले साल की तुलना में 10 लाख टन ज्यादा है।
DAP और NPK का स्टॉक भी दोगुना
केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय के अनुसार, Diammonium Phosphate (DAP) का स्टॉक 25 लाख टन है, यानी पिछले साल की तुलना में दोगुना। वहीं, NPK फर्टिलाइजर का कुल स्टॉक 56 लाख टन है, जो अब तक का सबसे ज्यादा रिकॉर्ड है। पिछले साल इसी समय देश में सिर्फ 31 लाख टन NPK उपलब्ध था।
Iran crisis: उत्पादन और मांग की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में आमतौर पर उर्वरक की मांग कम रहती है। मई से खरीफ सीजन शुरू होने के साथ ही मांग बढ़ती है। सामान्य रूप से यूरिया का उत्पादन हर महीने 25 लाख टन होता है, लेकिन मार्च 2026 में यह अनुमानित रूप से 17 लाख टन ही रहेगा। इस बार गैस की सप्लाई में थोड़ी कमी के कारण यूरिया प्लांट का वार्षिक मेंटेनेंस समय से पहले किया गया, ताकि उपलब्ध गैस का इस्तेमाल बेहतर तरीके से यूरिया उत्पादन में किया जा सके।
Iran crisis: अंतरराष्ट्रीय सप्लाई और ग्लोबल टेंडर
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए समय से पहले ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया था। फरवरी के मध्य तक 13.5 लाख टन यूरिया के आयात के ऑर्डर जारी किए गए थे, और मार्च के अंत तक इसका 90% स्टॉक भारत पहुँचने की उम्मीद है। रूस और मोरक्को से फर्टिलाइजर सप्लाई सामान्य तरीके से जारी है, जबकि सऊदी अरब से 3 मिलियन टन DAP की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आई है।
कड़ी निगरानी से ब्लैक मार्केट रोका जा रहा है
Iran crisis: देश के 652 जिलों में उर्वरक की बिक्री की कड़ी निगरानी की जा रही है। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि कहीं भी ब्लैक मार्केटिंग न हो और किसानों तक खाद समय पर पहुंचे।
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