Iran crisis: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग के बीच अब सबसे बड़ा सवाल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर खड़ा हो गया है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि अमेरिका खुद तय नहीं कर पा रहा कि यहां नौवहन कैसे सामान्य किया जाए। इसी वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
सहयोगी देशों पर ट्रंप का गुस्सा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सहयोगी देशों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। ट्रंप का कहना है कि जो देश इस मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें खुद आगे आना चाहिए। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिकी सेना अगले 2 से 3 हफ्तों में अपने हमले कम कर सकती है।
Iran crisis: ट्रंप के बदले हुए तेवर
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि फ्रांस जैसे देशों को इस स्ट्रेट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इससे पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि ईरान जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट को खोले, नहीं तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा। लेकिन अब उनके तेवर कुछ बदले हुए नजर आ रहे हैं।
Iran crisis: अमेरिका में दिख रहा असर
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का असर अब सीधे अमेरिका में दिखने लगा है। यहां पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच चुकी है। गैस के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे आम लोगों पर दबाव बढ़ गया है। वहीं, दुनिया के कई देशों में भी ईंधन संकट गहराने का खतरा मंडरा रहा है।
जंग ने बढ़ाई टेंशन
Iran crisis: हाल ही में अमेरिका ने ईरान के इस्फहान में एक परमाणु ठिकाने पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने दुबई के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। अब तक इस जंग में 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और तेल-गैस की सप्लाई पर भी बड़ा असर पड़ा है।
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