Iran Missile Attack: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। ईरान ने इजराइल पर 83वीं बार मिसाइल हमला किया है। इस बार हमले की सबसे खास बात यह रही कि मिसाइलों पर “भारत के लोगों को धन्यवाद” सहित कई देशों के नाम लिखे गए, जिससे यह मामला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि कूटनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।
मिसाइल हमले के साथ अंतरराष्ट्रीय संदेशों ने बढ़ाया विवाद
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) के अनुसार इस हमले में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों के साथ मानव रहित हवाई यानों का उपयोग किया गया। सामाजिक माध्यमों पर सामने आए वीडियो में ईरानी सैनिक मिसाइलों पर भारत, स्पेन, पाकिस्तान और जर्मनी के लिए आभार संदेश लिखते दिखाई दिए। ईरान ने इसे उन देशों के समर्थन के प्रति प्रतीकात्मक धन्यवाद बताया है, हालांकि इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।
Iran Missile Attack: इजराइल की सख्त प्रतिक्रिया, बड़े हमलों की चेतावनी
इस हमले के बाद इजराइल ने अपनी प्रतिक्रिया और तेज करने के संकेत दिए हैं। रक्षा मंत्री Israel Katz ने स्पष्ट किया कि अब जवाबी कार्रवाई और व्यापक होगी। उन्होंने कहा कि ईरान को पहले ही नागरिक क्षेत्रों पर हमले रोकने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद हमले जारी रहे। ऐसे में अब इजराइल उन सभी ठिकानों को निशाना बनाएगा जो ईरान की सैन्य और हथियार निर्माण गतिविधियों से जुड़े हैं।
Iran Missile Attack: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर
ईरान ने Strait of Hormuz को बंद घोषित कर दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ईरानी नौसेना ने तीन जहाजों को वापस लौटा दिया और चेतावनी दी कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से जुड़े किसी भी जहाज को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
Iran Missile Attack: अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और बढ़ता तनाव
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी इस संघर्ष में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्टों के अनुसार पिछले चार हफ्तों में अमेरिका ने 850 से अधिक टॉमहॉक प्रक्षेपास्त्रों का इस्तेमाल किया है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने के दावे सामने आए हैं, जिनमें बहरीन में वायु रक्षा प्रणाली से जुड़ा एक ठिकाना भी शामिल बताया जा रहा है।
ईरान के भीतर बिगड़ते हालात और बढ़ती पाबंदियां
ईरान के भीतर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। देश में इंटरनेट सेवा लगभग एक महीने से बंद है और एक नियंत्रित “दो-स्तरीय” प्रणाली लागू की गई है, जिसमें आम नागरिकों की पहुंच सीमित कर दी गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक इस संघर्ष में 1,937 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक शामिल हैं। साथ ही सैकड़ों शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान पहुंचा है।
खेल और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी पर भी असर
ईरान सरकार ने अपने खिलाड़ियों को उन देशों में भेजने पर रोक लगा दी है जिन्हें वह दुश्मन मानता है। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में ईरानी टीमों की भागीदारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि फुटबॉल विश्व कप को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में अनिश्चितता बनी हुई है।
युद्ध से रूस को आर्थिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ रूस को मिल रहा है। बढ़ती तेल कीमतों के कारण रूस को अपने कच्चे तेल को बेहतर दाम पर बेचने का अवसर मिला है। इसके अलावा प्राकृतिक गैस और उर्वरक के वैश्विक बाजार में भी उसे लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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