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अल्पसंख्यकों पर हिंसा पर चुप्पी क्यों? बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार पर कुमार विश्वास का सवाल

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर प्रसिद्ध कवि और विचारक कुमार विश्वास ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे न केवल एक समुदाय पर हमला बताया, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए शर्मनाक और पीड़ादायक करार दिया।

Kumar Vishwas: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर प्रसिद्ध कवि और विचारक कुमार विश्वास ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे न केवल एक समुदाय पर हमला बताया, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए शर्मनाक और पीड़ादायक करार दिया। कुमार विश्वास ने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ की गई हिंसा मानवता के मूल्यों पर सीधा प्रहार है। ऐसे मामलों में केवल संवेदनशीलता नहीं, बल्कि ठोस और निर्णायक कार्रवाई की भी आवश्यकता होती है।

सरकार को मजबूती से रखना चाहिए पक्ष

उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही होगी, लेकिन ऐसे मामलों में स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाना जरूरी है। कुमार विश्वास ने जोर देकर कहा कि मानव अधिकारों के उल्लंघन पर चुप्पी स्वीकार्य नहीं हो सकती।

Kumar Vishwas: हर मुद्दे पर शोर, लेकिन यहां चुप्पी क्यों?

कुमार विश्वास ने समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो छोटी-छोटी घटनाओं पर भी मानव हानि को लेकर जोरदार प्रतिक्रिया देता है। लेकिन जब बांग्लादेश में एक निर्दोष अल्पसंख्यक को जिंदा जला दिया जाता है, तो वही लोग मौन साध लेते हैं।
उन्होंने कहा, “न बयान आते हैं, न चिंता दिखाई देती है। यही दोहरापन दुनिया के सामने उजागर हो रहा है।”

अंतरराष्ट्रीय बहस होती है, तो यहां क्यों नहीं?

उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी युवा नेता की हत्या पर वैश्विक मंचों पर बहस हो सकती है, तो फिर अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी क्यों? कुमार विश्वास ने कहा कि मानवता की रक्षा किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का दायित्व है।

Kumar Vishwas: सांस्कृतिक विरासत पर भी खतरा

उन्होंने चिंता जताई कि जिन क्षेत्रों तक कभी भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत फैली थी, वहां आज हिंसा की आग पहुंचना बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि ऐसी आग को वहीं बुझाया जाना चाहिए, ताकि यह और न फैले।

राम के विचारों के साथ नए वर्ष का संदेश

अपने राम कथा के संदर्भ में कुमार विश्वास ने कहा कि भगवान राम भारत के जनमानस के दिलों और विचारों में सदियों से बसे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति कभी-कभी इन मूल्यों को भूल जाती है, इसलिए समय-समय पर उन्हें याद दिलाना जरूरी हो जाता है। उन्होंने अपील की कि जाते हुए अंग्रेजी नववर्ष को अगर राम के विचारों के साथ विदा किया जाए, तो आने वाला वर्ष भी उन्हीं मूल्यों के साथ आगे बढ़ेगा।

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