Kuno National Park: भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए आज का दिन बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक साबित हुआ है। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क (KNP) से एक बार फिर खुशियों भरी खबर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ ने कल तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह खबर न केवल कूनो प्रबंधन के लिए उत्साहजनक है, बल्कि पूरी दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। इस सुखद घटना के साथ ही भारत की धरती पर चीतों की कुल संख्या अब बढ़कर 38 पहुंच गई है, जो इस महात्वाकांक्षी परियोजना की सफलता का जीता-जागता प्रमाण है।
चुनौतियों से सफलता तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाकर बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। शुरुआत में जलवायु परिवर्तन और कुछ तकनीकी कारणों से कुछ वयस्क चीतों की मृत्यु ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, गामिनी जैसी मादा चीतों ने भारतीय वातावरण में न केवल खुद को ढाला, बल्कि सफल प्रजनन कर यह सिद्ध कर दिया कि कूनो की आबोहवा उनके कुनबे के विस्तार के लिए पूरी तरह अनुकूल है। कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार, मादा चीता गामिनी और उसके तीनों शावक फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं। पार्क के डॉक्टरों और विशेषज्ञों की एक विशेष टीम 24 घंटे उनकी निगरानी कर रही है।
* निगरानी: सीसीटीवी कैमरों और रेडियो कॉलर के माध्यम से मादा चीता की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
* सुरक्षा: शावकों को अन्य शिकारियों से बचाने के लिए विशेष सुरक्षा घेरा बनाया गया है ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित ढंग से बड़े हो सकें।
* आहार: गामिनी के खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि वह शावकों का पालन-पोषण बेहतर तरीके से कर सके।

Kuno National Park: 38 चीतों के साथ नया कीर्तिमान
गामिनी के इन तीन शावकों के आगमन के बाद कूनो में चीतों का गणित अब और मजबूत हो गया है।
* कुल संख्या: अब भारत में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 38 चीते हो गए हैं।
* स्वदेशी जन्म: इनमें से कई शावक ऐसे हैं जिनका जन्म भारतीय मिट्टी पर ही हुआ है, जो यह दर्शाता है कि चीतों की अगली पीढ़ी अब पूरी तरह से ‘भारतीय’ है।
* पारिस्थितिकी संतुलन: चीतों की बढ़ती संख्या से पार्क के भीतर और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में सुधार देखने को मिल रहा है।
पर्यटन और स्थानीय विकास की नई उम्मीदें
कूनो में चीतों के बढ़ते परिवार का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर पड़ने वाला है। आने वाले समय में जब ये शावक थोड़े बड़े होंगे और पर्यटकों के लिए दीदार सुलभ होगा, तो श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार की योजना कूनो को विश्व स्तरीय ‘चीता सफारी’ के रूप में विकसित करने की है, जिसमें ये नन्हे मेहमान मुख्य आकर्षण होंगे। ‘गामिनी’ के तीन शावकों का जन्म यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सही हो, तो विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को भी वापस लाया जा सकता है। यह सफलता केवल एक विभाग की नहीं, बल्कि उन सभी वैज्ञानिकों और वनकर्मियों की है जिन्होंने दिन-रात एक कर इन विदेशी मेहमानों की सेवा की। देश को अब उम्मीद है कि आने वाले समय में कूनो की ये किलकारियां पूरे भारत के अन्य जंगलों में भी सुनाई देंगी।
Report BY: संजय कुमार
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