Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जिले में मोहम्मदपुर कला में राजनीतिक हलचल चरम पर रही। जय भीम मिशन के जिला अध्यक्ष सुशील कनौजिया की प्रस्तावित मोहम्मदपुर कला से मोहम्मदी तक होने वाली पदयात्रा को लेकर सुबह से ही तनावपूर्ण माहौल बना रहा। प्रशासन ने पदयात्रा की अनुमति नहीं दी और सुशील कनौजिया को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके विरोध में अंबेडकर पार्क में सैकड़ों कार्यकर्ता जुट गए, जिससे स्थिति और गंभीर होती चली गई।
कार्यकर्ताओं-अधिकारियों के बीच तीखी बहस
सुशील कनौजिया ने आरोप लगाया कि अनुमति के लिए समय पर आवेदन देने के बावजूद किसी आंतरिक आपत्ति के नाम पर पदयात्रा रोकी गई। उन्होंने इसे संविधान रक्षा की लड़ाई में अवरोध बताया और कहा कि अगर हम संविधान की बात भी न करें, तो फिर लोकतंत्र कैसा? दयाराम कनौजिया, शिवम कनौजिया, मांगू लाल कनौजिया सहित बड़ी संख्या में मिशन कार्यकर्ता मौके पर डटे रहे। कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के बीच लगातार तीखी बहस होती रही। स्थिति बिगड़ने की आशंका में पसगवां, उचौलिया और मोहम्मदी से भारी पुलिस बल बुला लिया गया, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
Lakhimpur Kheri: अधिकारियों ने की स्थिति नियंत्रण करने की कोशिश
इस पूरे घटनाक्रम में उस समय नया मोड़ आया जब भाजपा नेता और नगर पालिका अध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा कन्हैया मौके पर पहुंचे। उन्होंने माहौल शांत करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। वहीं, उनका बेटा स्पर्श मल्होत्रा गोलू मिशन कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा दिखा, जिससे राजनीतिक चर्चाएँ और तेज हो गईं। तनाव बढ़ता देख तहसीलदार अरुण कुमार, क्षेत्राधिकारी मोहम्मदी अरुण कुमार सिंह तथा कोतवाली प्रभारी उमेश चंद्र चौरसिया टीम के साथ पहुंचे। लंबी बातचीत के बाद अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रण में करने की कोशिश की।
आखिरकार, सुशील कनौजिया ने पदयात्रा और कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके बाद माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ, लेकिन पूरे दिन मोहम्मदपुर कला में पुलिस बल की तैनाती, नारेबाजी और नेताओं की हलचल चर्चा का विषय बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने तनावपूर्ण हालात लंबे समय बाद देखने को मिले, जहाँ सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क थे और दूसरी ओर कार्यकर्ता अपने नेता के समर्थन में अड़े थे।
पदयात्रा भले ही स्थगित हो गई हो, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्र की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। मिशन के कार्यकर्ता जल्द नई तारीख घोषित करने की बात कह रहे हैं, जबकि मेहरोत्रा परिवार की दो अलग-अलग स्थितियों ने भी राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
Report By: संजय कुमार राठौर
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