Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में आज राजनीतिक पारा उस वक्त चढ़ गया, जब कांग्रेस पार्टी के सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। मामला कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सांसद राहुल गांधी और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ पिछले 11 वर्षों से चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले से जुड़ा है। कांग्रेसियों ने इसे केंद्र सरकार की ‘दमनकारी नीति’ और ‘फर्जी मुकदमा’ करार देते हुए देवकली रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने की कोशिश
शीर्ष नेतृत्व के समर्थन में एकजुट हुई कांग्रेस सुबह से ही लखीमपुर खीरी के विभिन्न ब्लॉक और तहसीलों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। कार्यकर्ताओं में नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त था। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में एकजुट हुए कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केंद्रीय एजेंसियों (ED और CBI) का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनका तर्क है कि 11 साल बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया है, जो यह साबित करता है कि यह केवल राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। भाजपा कार्यालय पर भारी नारेबाजी और प्रदर्शन हाथों में पार्टी का झंडा और सरकार विरोधी तख्तियां लिए कांग्रेस कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए देवकली रोड स्थित भाजपा कार्यालय की ओर बढ़े। ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘राहुल गांधी संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने धरना दिया और सरकार से इस मुकदमे को तुरंत वापस लेने की मांग की।
Lakhimpur Kheri: पुलिस से तीखी झड़प
कांग्रेस के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। देवकली रोड पर भारी मात्रा में पुलिस बल और पीएसी (PAC) तैनात की गई थी। जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय के करीब जाने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और बहस हुई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारी मौके पर डटे रहे ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि राहुल गांधी देश की जनता की आवाज उठा रहे हैं, जिससे घबराकर सरकार उन्हें कानूनी उलझनों में फंसाना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस नेतृत्व का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन केवल लखीमपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश व्यापी बनाया जाएगा।
वही लखीमपुर खीरी में हुआ यह प्रदर्शन न केवल कांग्रेस की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी को भी तेज कर गया है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रशासन को अपना मांग पत्र सौंपा, जिसमें मुकदमे की निष्पक्ष जांच और राजनीतिक हस्तक्षेप को बंद करने की मांग की गई है। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस घेराव की चर्चा जोरों पर है।







