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Lakhimpur Kheri: खीरी में हाथियों ने ली किसान की जान, गांव में मचा कोहराम

Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जिले के मझगई थाना क्षेत्र के चौखड़ा फार्म में बीती रात जंगल से निकले हाथियों के झुंड ने ऐसा आतंक मचाया कि पूरा गांव दहशत में आ गया। इस बीच खेत की रखवाली कर रहे 55 वर्षीय मजदूर राम बहादुर पुत्र रोशन लाल को हाथियों ने निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया। रात लगभग 12 बजे हुई इस हृदय विदारक घटना ने इलाके में मातम फैला दिया है।

गन्ने के खेत में घुसे हाथी

मझगई वन रेंज से सटे चौखड़ा फार्म में रात करीब दस बजे जंगल से हाथियों का झुंड अचानक बाहर निकल आया। यह झुंड कस्बा निवासी समीर पांडे के गन्ने के खेत में घुस गया। खेत की रखवाली करने वाले मजदूर राम बहादुर उस समय कमरे से बाहर निकले और कुछ दूरी पर मौजूद खेतों की रखवाली कर रहे लालता और सुशील को मदद के लिए बुलाया। तीनों ने मिलकर हाथियों को पटाखे दागकर भगाने की कोशिश की। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी काफी उग्र अवस्था में थे और खेत में भारी नुकसान भी कर रहे थे। इसी दौरान झुंड के एक बड़े हाथी ने मजदूरों की तरफ हमला बोल दिया।

Lakhimpur Kheri: पैर पकड़कर घसीट ले गया हाथी

हमले के दौरान लालता और सुशील किसी तरह भागकर बच निकले, लेकिन हाथियों का झुंड राम बहादुर पर टूट पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक हाथी ने राम बहादुर को पैर से पकड़कर दूर खींच लिया और पास स्थित मीता सिंह के खेत में ले जाकर बेरहमी से कुचलकर मार डाला। हादसा इतना भयावह था कि मजदूर की दाईं आंख बाहर निकल आई और शव गन्ने के खेत में काफी अंदर दबा रह गया।

गांव में कोहराम

रात में ही ग्रामीणों ने टॉर्च लेकर खोजबीन शुरू कर दी, परंतु गन्ने के घने खेतों की वजह से कुछ पता नहीं चल पाया। आखिरकार तड़के करीब 4 बजे राम बहादुर का शव गन्ने की पत्तियों के बीच मिला। शव देखते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और गांव में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही मझगई पुलिस और वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह टीम सहित मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन और ग्रामीण गंभीर मांगों पर अड़े रहे।

Lakhimpur Kheri: मुआवजा नहीं मिला तो शव नहीं उठने दिया जाएगा

ग्रामीणों ने हाथियों के लगातार हमलों पर सरकार की अनदेखी का आरोप लगाया है। परिवार ने मृतक के एक पुत्र को सरकारी नौकरी, 5 लाख रुपये मुआवजा और जंगल के किनारे फेंसिंग लगाने की मांग रखी है। जब तक इन मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक शव न उठाने का निर्णय लिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से हाथियों का यह झुंड जंगल से बाहर घूमता दिख रहा था, लेकिन वन विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसानों का आरोप है कि हाथी लगातार खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और उनकी सुरक्षा खतरे में है।

कौन थे राम बहादुर?

मृतक राम बहादुर पिछले 40 वर्षों से खेतों में चौकीदारी और मजदूरी कर रहा था। उसे महीने में मात्र छह हजार रुपये वेतन मिलता था। उसके पास केवल दो बीघा जमीन थी, जिस पर वह किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करता था। राम बहादुर के चार बेटियाँ और दो बेटे हैं। परिवार पूरी तरह उसी की कमाई पर निर्भर था। मजदूर रात-दिन खेत में रहकर गन्ने की रखवाली करता था ताकि बच्चों की भूख मिटा सके। उसकी मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। वहीं घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत के साथ आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथियों की निगरानी, फेंसिंग और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। यह दर्दनाक घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जंगल के किनारे बसे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष कितना बड़ा संकट बन चुका है।

Report By: संजय कुमार राठौर   

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