Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा कर रही है, लेकिन लखीमपुर खीरी जिले में हाल ही में सामने आए करोड़ों रुपये के नियमविरुद्ध भुगतान के मामले ने विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में कुल 9.01 करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान का खुलासा होने के बाद शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए।
ये सभी कार्रवाई के दायरे में
शासन की उच्च स्तरीय जांच में पाया गया कि जिले के चार ब्लॉकों में विकास कार्यों और अन्य मदों के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान नियमों को ताक पर रखकर किया गया। लखनऊ से आए आदेशों के बाद निम्नलिखित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई…
ज्ञानेंद्र कुमार सिंह (BDO सदर): ₹2.27 करोड़ का अनियमित भुगतान पाया गया।
अश्वनी कुमार सिंह (BDO मोहम्मदी): ₹2.58 करोड़ का नियमविरुद्ध भुगतान।
महावीर सिंह (BDO बिजुआ): ₹1.46 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान के दोषी।
जयेश सिंह (BDO निघासन): सबसे अधिक ₹2.70 करोड़ का अनियमित भुगतान पाया गया।
इन चारों अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों के सीज होने से जिले में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
Lakhimpur Kheri: पसगवां BDO का रहस्य
हालांकि चारों BDO पर कार्रवाई हुई, पसगवां BDO मोहित कौशिक पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच में पाया गया कि पसगवां ब्लॉक में भी लगभग ₹1.10 करोड़ का नियमविरुद्ध भुगतान हुआ है। वहीं अब लोगों के बीच ये सवाल चर्चा में बने है कि क्या ₹1.10 करोड़ की अनियमितता गंभीर नहीं मानी गई? क्या किसी रसूखदार अधिकारी के संरक्षण के चलते मोहित कौशिक को राहत मिली? और क्या नियम और कानून पद और रसूख देखकर लागू किए जा रहे हैं?
जवाबदेही तय करने की मांग
विशेषज्ञ और नागरिक संगठनों की मांग है कि पसगवां BDO के ₹1.10 करोड़ के मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। भेदभावपूर्ण कार्यवाही करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। नियम सभी के लिए समान लागू हों, यह सुनिश्चित किया जाए।
Report By: संजय कुमार राठौर
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