Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के मोहम्मदी विद्युत उपखंड के अंतर्गत आने वाला गुलौली तिराहा इन दिनों किसी बड़े हादसे के इंतजार में खड़ा नजर आ रहा है। यहाँ सड़क के किनारे स्थित एक जर्जर विद्युत पोल विभाग की घोर लापरवाही की गवाही दे रहा है। वर्षों पुराना और नीचे से पूरी तरह गल चुका यह खंभा कभी भी गिर सकता है, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मोहम्मदी विद्युत उपखंड के अधिकारी अपनी एयरकंडीशनर वाली फाइलों में व्यस्त हैं, जबकि जमीन पर मौत का यह खंभा राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों के सिर पर तलवार बनकर लटक रहा है।
जर्जर खंभे के चलते स्थानीय लोगों में आक्रोश
गुलौली तिराहा मोहम्मदी का एक व्यस्त इलाका है, जहाँ से हर दिन हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन, स्कूली बच्चे और पैदल राहगीर गुजरते हैं। इसी तिराहे के निकट स्थित एक विद्युत पोल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसका निचला हिस्सा पूरी तरह जंग खाकर खोखला हो चुका है। तेज हवा या किसी वाहन के हल्का सा छू जाने मात्र से यह खंभा धराशायी हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इसकी शिकायत संबंधित लाइनमैन और उपखंड कार्यालय में की है, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। जर्जर पोल के ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन लाइनें इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। यदि यह पोल गिरता है, तो न केवल जानमाल का भारी नुकसान होगा, बल्कि बिजली के तारों की चपेट में आकर कई निर्दोष लोगों की जान भी जा सकती है।
Lakhimpur Kheri: विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
मोहम्मदी विद्युत विभाग की यह कार्यशैली समझ से परे है। सरकार की ओर से जर्जर तारों और खंभों को बदलने के लिए हर साल लाखों-करोड़ों का बजट जारी किया जाता है, लेकिन गुलौली तिराहे की स्थिति देखकर लगता है कि वह बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। ब्यूरो चीफ संजय कुमार राठौर के विश्लेषण के अनुसार, बिजली विभाग की एक पुरानी परंपरा रही है कि वे हादसा होने से पहले नहीं जागते। विभाग को शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है, जिसके बाद मुआवजा बांटने और जांच कमेटी बैठाने का कोरम पूरा किया जा सके। सवाल यह उठता है कि जब खतरा साफ नजर आ रहा है, तो विभाग ‘प्रीवेंटिव मेंटेनेंस’ (निवारक रखरखाव) क्यों नहीं कर रहा?
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल?
जब इस संबंध में स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो वे अक्सर ‘बजट नहीं है’ या ‘नया पोल आवंटित नहीं हुआ है’ जैसे रटे-रटाए जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं, दुकानदार जो इस पोल के ठीक नीचे अपना व्यापार करते हैं, वे हर पल दहशत में रहते हैं। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि हमें डर लगता है कि कहीं रात-बिरात यह खंभा हमारी दुकान पर न गिर जाए। कोहरे के मौसम में वैसे ही दिखाई कम देता है, अगर कोई वाहन इससे टकरा गया तो पूरी लाइन नीचे आ जाएगी।
वहीं अब विद्युत विभाग को यह समझना चाहिए कि बिजली का करंट और गिरता हुआ पोल किसी को मौका नहीं देता। गुलौली तिराहा एक सार्वजनिक स्थल है, यहाँ भीड़भाड़ रहती है। एक छोटा सा पोल गिरना केवल बिजली आपूर्ति ठप होना नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। क्या विभाग के आला अधिकारी तब जागेंगे जब कोई मासूम इसकी चपेट में आएगा? क्या तब कार्रवाई होगी जब कोई परिवार अपना चिराग खो देगा? मोहम्मदी की जनता अब इन सवालों के जवाब चाहती है।
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