Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जिले के नीमगांव थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए जुआरियों का एक बड़ा साम्राज्य फल-फूल रहा है। हालांकि पुलिस की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खाकी और जुआरियों के बीच ‘अपवित्र गठबंधन’ के चलते यहाँ प्रतिदिन लाखों रुपये का वारा-न्यारा हो रहा है।
मिर्जापुर गांव बना जुआरियों का अड्डा
पूरा मामला नीमगांव थाना क्षेत्र के हल्का नंबर तीन स्थित ग्राम मिर्जापुर का है। ग्रामीणों के अनुसार, यहाँ ताश के पत्तों से प्रतिदिन लाखों रुपये का जुआ खेला जाता है। जुआ संचालक इतने बेखौफ हैं कि वे न केवल स्थानीय बल्कि बाहरी जनपदों से भी बड़े जुआरियों को बुलाते हैं। स्थिति यह है कि गांव की शांति भंग हो रही है और युवा पीढ़ी इस दलदल में फंसती जा रही है।
Lakhimpur Kheri: ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पुलिस की भूमिका को लेकर हुआ है। ग्रामीण नन्नू और अन्य निवासियों का आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों की जुआरियों से घनिष्ठ संबंध हैं। सूचना होते ही सतर्क हो जाते हैं जुआरी: ग्रामीणों का कहना है कि जब भी कोई नागरिक पुलिस को जुए की सूचना देता है, तो कथित तौर पर पुलिसकर्मी ही फोन कर जुआरियों को शिकायत की जानकारी दे देते हैं। शिकायतकर्ता को धमकी: आरोप है कि शिकायत करने वाले ग्रामीणों को पुलिस का डर दिखाने के साथ-साथ जुआरियों द्वारा डराया-धमकाया भी जाता है। इसी मिलीभगत और आक्रोश के चलते ग्रामीणों ने खुद वीडियो बनाकर इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

पुलिस प्रशासन का पक्ष
इस सनसनीखेज मामले पर नीमगांव थाना अध्यक्ष प्रवीर कुमार गौतम का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और जुए की शिकायत उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। थाना अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी जुआ संचालक या पुलिसकर्मी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं मिर्जापुर गांव का यह वायरल वीडियो केवल जुए की हकीकत नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र में पैठ जमा चुके भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। अब देखना यह होगा कि थाना अध्यक्ष के आश्वासन के बाद क्या वास्तव में इन ‘सफेदपोश’ जुआरियों पर नकेल कसी जाएगी या जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होगी।
हमारा संस्थान इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है, यह रिपोर्ट ग्रामीणों के आरोपों और वायरल सामग्री पर आधारित है।
Report By: संजय कुमार राठौर
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