Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा टाइगर रिज़र्व के घने जंगल केवल बाघों, तेंदुओं और अन्य हिंसक वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि कई तरह के जहरीले जीव-जंतुओं का भी घर हैं। तराई क्षेत्र से लगे गांवों और कस्बों में ये जीव अक्सर भटक कर पहुंच जाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल जाती है। ऐसे में इनकी सुरक्षित रेस्क्यू करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन में कार्यरत मोटिवेटर और अभीप्रेरक नाज़रून निशा, जो महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बनकर उभर रही हैं।
एक ही दिन में तीन सांपों का सफल रेस्क्यू
बीते दिन नाज़रून निशा को लगातार तीन अलग-अलग स्थानों से सांप दिखाई देने की सूचना मिली। मझगई वन रेंज में रेड स्नेक, पलिया वन रेंज में इंडियन एकेडमी स्कूल के सामने प्लॉट में रेड स्नेक और अजीत नगर में एक विशाल पाइथन देखे जाने की जानकारी उन्हें मिली। सूचना मिलते ही नाज़रून अपनी टीम के साथ तीनों स्थानों पर पहुंचीं। घंटों की मेहनत और तकनीकी कौशल के साथ तीनों सांपों को उन्होंने सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया और बाद में उन्हें अलग-अलग सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ दिया।
Lakhimpur Kheri: महिलाओं का डर खत्म करना उद्देश्य
बातचीत में मोटिवेटर नाज़रून ने बताया कि वह इस कार्य में इसलिए आईं ताकि महिलाओं और आम लोगों के मन से सांपों व वन्यजीवों के प्रति अनावश्यक डर को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी के अभाव में लोग अक्सर डर जाते हैं, जबकि ऐसे जीवों को सुरक्षित ढंग से हैंडल किया जा सकता है।
ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने में जुटी नाज़रून
नाज़रून क्षेत्र में लगातार वन्यजीव संरक्षण, सांपों की पहचान, और रेस्क्यू प्रक्रिया को लेकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। उनके साहस और समर्पण ने न सिर्फ कई जीवों की जान बचाई है, बल्कि महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का नया रास्ता खोला है।
Lakhimpur Kheri: चर्चा में महिला रेस्क्यूअर
दुधवा इलाके में एक महिला द्वारा इतने खतरनाक और तकनीकी कार्य को अंजाम देने की वजह से नाज़रून निशा इस समय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उनके काम को ग्रामीणों, वन विभाग और स्थानीय संगठनों द्वारा सराहा जा रहा है।
Report By: संजय कुमार राठौर







