Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन को हिला कर रख दिया है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र ‘मुड़िया महंत मंदिर’ की शुचिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान दौर में सोशल मीडिया पर ‘लाइक्स’ और ‘व्यूज’ की भूख इस कदर बढ़ गई है कि लोग पवित्रता और अश्लीलता के बीच का अंतर भूलते जा रहे हैं। ताजा मामला शहर के मोहल्ला मिश्राना स्थित ऐतिहासिक मुड़िया महंत मंदिर का है, जहाँ महिला द्वारा फिल्मी गाने पर रील बनाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, लखीमपुर शहर के अति प्राचीन और प्रतिष्ठित मुड़िया महंत मंदिर के परिसर में एक महिला (जिसकी पहचान प्रीति के रूप में हुई है) ने मंदिर की मर्यादा को ताक पर रखकर एक रील शूट की। इस रील में महिला बॉलीवुड के प्रसिद्ध रोमांटिक गाने “जरा सा चूम लूँ मैं…” पर थिरकती नजर आ रही है। जैसे ही यह वीडियो महिला की फेसबुक आईडी से सार्वजनिक हुआ, देखते ही देखते यह पूरे जिले में आग की तरह फैल गया। वीडियो में मंदिर के स्तंभों और पवित्र प्रांगण का उपयोग एक ‘डांस फ्लोर’ की तरह किया गया है, जिसे देखकर श्रद्धालु और स्थानीय निवासी हतप्रभ हैं।
Lakhimpur Kheri: मंदिर है पिकनिक स्पॉट?
इस वीडियो के वायरल होते ही मिश्राना मोहल्ला सहित पूरे लखीमपुर शहर में भारी आक्रोश व्याप्त है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर वह स्थान है जहाँ लोग मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाते हैं, न कि फिल्मी गानों पर प्रदर्शन करने के लिए। स्थानीय निवासी और नियमित मंदिर जाने वाले भक्तों ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है। हम अपने बच्चों को मंदिर में संस्कार सिखाने लाते हैं, और यहाँ खुलेआम इस तरह की हरकतें हो रही हैं। प्रशासन को इस पर कड़ा एक्शन लेना चाहिए ताकि कोई दोबारा हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ न कर सके।
मंदिर प्रशासन और पुजारी ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुड़िया महंत मंदिर के पुजारी और मंदिर के सर्वराकार ने तत्काल कदम उठाए हैं। मंदिर प्रशासन ने इस कृत्य को ‘अक्षम्य’ बताते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है।
पुजारी का कहना है कि मंदिर की एक गरिमा होती है, एक मर्यादा होती है। यहाँ जूते पहनकर प्रवेश करना भी वर्जित है, वहाँ कोई फिल्मी गानों पर नाच रहा है। यह सीधे तौर पर सनातन धर्म और हमारे ईष्ट का अपमान है। हमने प्रशासन से मांग की है कि उक्त महिला के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
वहीं एसडीएम को दी गई शिकायत में मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर परिसर में बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की व्यावसायिक या मनोरंजन संबंधी रील बनाना प्रतिबंधित है। पुलिस और प्रशासन अब इस मामले की तकनीकी जांच कर रहे हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार, इस तरह का कृत्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत आता है जो “किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने” से संबंधित हैं। यदि पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है, तो संबंधित महिला की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आपको बता दें कि लखीमपुर की यह घटना कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में केदारनाथ, उज्जैन के महाकाल मंदिर और अयोध्या के राम मंदिर के आसपास भी ऐसी रील बनाने के मामले सामने आए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या डिजिटल दुनिया की लोकप्रियता इतनी बड़ी हो गई है कि वह हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों को खोखला कर रही है? सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए मंदिर अब केवल एक ‘खूबसूरत बैकग्राउंड’ बनकर रह गए हैं। वे यह भूल जाते हैं कि जिस स्थान पर वे नाच रहे हैं, वहाँ लाखों लोगों की श्रद्धा और अटूट विश्वास जुड़ा होता है।
Report By: संजय कुमार राठौर
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