Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी का मोहम्मदी क्षेत्र इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। शासन और प्रशासन की सख्त गाइडलाइनों के बावजूद मोहम्मदी नगर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक मिट्टी खनन माफियाओं का नेटवर्क खुलेआम सक्रिय है। हालात ऐसे हैं कि माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना चीर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग और स्थानीय प्रशासन आंखें मूंदे बैठे नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसकी शह पर यह करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार मोहम्मदी की सड़कों और खेतों में दिन-रात फल-फूल रहा है?
भट्टे की रॉयल्टी की आड़ में ‘दो नंबर’ का बड़ा खेल
सूत्रों के अनुसार, मोहम्मदी में खनन माफियाओं ने कार्रवाई से बचने का एक बेहद शातिर तरीका इजाद कर लिया है। यह पूरा अवैध कारोबार ईंट भट्टों की रॉयल्टी की आड़ में संचालित किया जा रहा है। कागजों में मिट्टी ईंट भट्टों के लिए निकाली जाती है और रॉयल्टी भी उसी के नाम पर जमा कर दी जाती है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। जबकि नियमों के अनुसार, जिस कार्य के लिए रॉयल्टी जारी होती है, मिट्टी उसी स्थान पर गिराई जानी चाहिए। लेकिन मोहम्मदी में कागजों में मिट्टी भट्टे तक जाती दिखती है, जबकि असल में वह बड़े-बड़े कमर्शियल प्लॉटों, कॉलोनियों और भू-माफियाओं की जमीन पर डंप कर दी जाती है। इस पूरे खेल में सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
Lakhimpur Kheri: दिन में ‘एक नंबर’, रात में ‘दो नंबर’
अवैध खनन का यह कारोबार पूरी योजना के साथ संचालित किया जा रहा है। खनन माफियाओं ने समय का ऐसा चक्र तय कर रखा है, जिससे प्रशासन की नजरों से बचा जा सके। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक: इस दौरान रॉयल्टी की आड़ में सीमित मात्रा में वैध दिखने वाला ‘एक नंबर’ का काम किया जाता है। रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक: असली खेल रात के अंधेरे में शुरू होता है। जब अधिकारी और आम लोग गहरी नींद में होते हैं, तब जेसीबी मशीनें और डंपर बिना किसी कागजी कार्रवाई के खेतों और खाली जमीनों से मिट्टी निकालना शुरू कर देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में जेसीबी की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई देती हैं, लेकिन कोई देखने या रोकने नहीं आता।
बढ़ी माफियाओं की सक्रियता
मौजूदा समय में पड़ रही भीषण ठंड और घना कोहरा खनन माफियाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। दृश्यता कम होने का फायदा उठाकर तड़के सुबह और देर रात दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और डंपर नगर की सड़कों पर बेधड़क दौड़ते नजर आते हैं। जेसीबी मशीनों के जरिए उपजाऊ खेतों को गहरे गड्ढों और तालाबों में तब्दील किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पर्यावरण संतुलन और भूजल स्तर पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
Lakhimpur Kheri: रातभर दौड़ते डंपर
मोहम्मदी नगर और आसपास के क्षेत्रों में नई कॉलोनियों और प्लॉटों का तेजी से विकास हो रहा है। इसी का फायदा उठाकर मिट्टी माफियाओं ने प्लॉट मालिकों से मोटे सौदों में भराई का ठेका ले रखा है। रातभर डंपरों की आवाजाही से न सिर्फ सरकारी राजस्व की चोरी हो रही है, बल्कि नगर की सड़कों की हालत भी बद से बदतर होती जा रही है। भारी वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल?
सबसे चिंताजनक पहलू प्रशासन की चुप्पी है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को रात के सन्नाटे में चल रही जेसीबी और डंपरों की आवाजें सुनाई नहीं देतीं? या फिर यह पूरा अवैध कारोबार किसी बड़े संरक्षण के तहत संचालित हो रहा है? लोगों का आरोप है कि खनन माफियाओं के तार रसूखदार लोगों से जुड़े हुए हैं, इसी वजह से पुलिस और खनन विभाग उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं।
Report By: संजय कुमार राठौर
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