land for job case: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने ‘लैंड फॉर जॉब’ स्कैम में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय किए जाने को सत्ता का दुरुपयोग बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन अदालत में हर बार सच्चाई सामने आ जाती है।
चार्जशीट को बताया राजनीतिक प्रतिशोध
रविवार को मीडिया से बातचीत में सुधाकर सिंह ने कहा, “हर दो-तीन साल में नए मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में अब तीसरी चार्जशीट दाखिल की गई है। पहली और दूसरी चार्जशीट के दौरान हमारे नेताओं को अदालत से राहत मिली थी। हर बार सुनवाई के बाद सच सामने आता है।”
उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। “सरकार विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए एजेंसियों का सहारा ले रही है, लेकिन न्यायपालिका तथ्यों के आधार पर फैसला करती है,” उन्होंने कहा।
land for job case: केंद्र सरकार और विदेश नीति पर भी हमला
सुधाकर सिंह ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे साफ संकेत मिलता है कि संघ भी मौजूदा सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पकड़ कमजोर हुई है और देश की विदेश नीति निचले स्तर पर पहुंच गई है। राजद सांसद ने कहा,“आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री की छवि पहले जैसी नहीं रह गई है। कई वैश्विक नेता खुलकर आलोचना कर रहे हैं, जो भारत की कूटनीति की स्थिति को दर्शाता है।”
राम मंदिर से जुड़ी घटना पर प्रतिक्रिया
अयोध्या के राम मंदिर परिसर में एक कश्मीरी व्यक्ति के प्रवेश की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधाकर सिंह ने इसे “छोटी बात” करार दिया। उन्होंने कहा,
“धार्मिक स्थल आस्था के केंद्र होते हैं। अगर कोई व्यक्ति वहां पूजा करने आता है तो इसमें सुरक्षा या अपमान की बात कहां से आती है? अपमान तब होता है जब कोई तोड़फोड़ या हिंसा करे।” उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा करना उचित नहीं है।
land for job case: राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत
राजद सांसद के इन बयानों से स्पष्ट है कि ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले को लेकर सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, जबकि मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है।
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