LPG Gas Crisis: भारत में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर लोगों में लगातार चिंता रहती है, खासकर जब वैश्विक तनाव जैसे ईरान-इज़राइल संघर्ष सामने आते हैं। 140 करोड़ की आबादी वाले देश में एलपीजी हर घर की जरूरत है, और आयात पर निर्भरता के कारण इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि देश में कुल कितने गैस सिलेंडर हैं और सरकार ने आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
देश में एलपीजी कनेक्शनों का विशाल नेटवर्क
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में अब घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की संख्या 33 करोड़ से अधिक हो गई है। अधिकांश परिवारों के पास डबल सिलेंडर कनेक्शन (DBC) होता है, जिससे देश में कुल एलपीजी सिलेंडरों की संख्या लगभग 66 करोड़ के आसपास पहुँच जाती है। यह आंकड़ा देश में गैस वितरण नेटवर्क की मजबूती और विस्तार को दर्शाता है।
LPG Gas Crisis: पिछले दशक में दोगुनी हुई गैस पहुंच
साल 2014 में भारत में केवल 14.5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे। पिछले 10–12 वर्षों में यह संख्या दोगुनी होकर 33 करोड़ तक पहुँच गई है। इस विस्तार में सबसे बड़ा योगदान प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का रहा है। इस योजना के तहत अब तक लगभग 10.4 करोड़ गरीब और ग्रामीण परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले कनेक्शन दिए गए हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में गैस पहुँच बढ़ी और महिलाओं को धुएं से राहत मिली।
पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का बढ़ता दायरा
शहरों में अब सिलेंडर के बजाय पाइपलाइन के जरिए सीधे किचन तक गैस पहुंचाने की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.5 करोड़ घरों में पाइपलाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध है। यह सिलेंडर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प है, क्योंकि इसमें बार-बार रिफिलिंग की जरूरत नहीं होती।
LPG Gas Crisis: कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपयोग
एलपीजी केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। देश में लगभग 45,000 होटल और रेस्टोरेंट और 20,000 छोटे-बड़े उद्योग गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस व्यापक वितरण नेटवर्क से संकट के समय भी आपूर्ति बाधित नहीं होती।

संकट प्रबंधन और सरकारी रणनीति
वैश्विक तनावों और हॉर्मुज जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण रूट पर संभावित व्यवधानों के बीच, भारत के लिए गैस आयात चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरकार ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और गैस कंपनियों में पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नियमित अंतराल पर पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बैठक कर आपूर्ति और कीमतों पर नजर बनाए रखते हैं। वर्तमान में सभी गैस एजेंसियों और वितरण नेटवर्क को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी तरह की कालाबाजारी या आपूर्ति बाधा न हो।
भारत ने पिछले एक दशक में घरेलू गैस नेटवर्क को दोगुना कर नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी है। 33 करोड़ कनेक्शन और 66 करोड़ सिलेंडर, मजबूत वितरण प्रणाली और PNG नेटवर्क के विस्तार ने देश को संभावित संकटों के लिए तैयार किया है। सरकार लगातार निगरानी और नियंत्रण बनाए रख रही है, जिससे नागरिकों को एलपीजी की आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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