Maharashtra news: महाराष्ट्र सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एक खास ‘टास्क फोर्स’ बनाई है, जो यह पता लगाएगी कि बच्चे सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत में क्यों फंस रहे हैं और इससे कैसे बाहर निकाला जाए। राज्य के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार ने विधान परिषद में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगला अधिवेशन शुरू होने से पहले रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
सोशल मीडिया और गेमिंग के असर की होगी गहराई से जांच
सरकार की यह टास्क फोर्स 16 साल से कम उम्र के बच्चों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के इस्तेमाल का पूरा अध्ययन करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि इसका बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और पढ़ाई पर क्या असर पड़ रहा है। समिति डिजिटल विज्ञापनों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और देश-विदेश के कानूनों का भी अध्ययन करेगी। जरूरत पड़ने पर कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों की सिफारिश की जाएगी। सरकार का साफ संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के अनियंत्रित उपयोग पर अब सख्ती हो सकती है।
Maharashtra news: बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर जताई गई चिंता
विधान परिषद में भाजपा विधायक निरंजन डावखरे और संजय केणेकर ने यह मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ रहा है और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं। डावखरे ने मांग की कि आत्महत्या के लिए उकसाने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई हो। साथ ही आपत्तिजनक और खतरनाक ऐप्स पर प्रतिबंध लगाकर उनके निर्माताओं पर आपराधिक केस दर्ज किए जाएं। इस पर मंत्री शेलार ने कहा कि सोशल मीडिया का नियंत्रण केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इस मुद्दे पर केंद्र से समन्वय कर आगे कदम उठाए जाएंगे।
फर्जी और भ्रामक विज्ञापनों पर भी होगी कार्रवाई
Maharashtra news: मंत्री शेलार ने बताया कि राज्य में 18 साल से कम उम्र के करीब 4 करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से लगभग 3 करोड़ 15 साल से कम उम्र के हैं। ऐसे में बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। 2 फरवरी 2026 को राज्य सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर इस विशेष टास्क फोर्स का गठन किया। साथ ही सरकार ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अश्लील, भ्रामक या आपराधिक विज्ञापन पाए जाने पर सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि बच्चों को डिजिटल लत से बचाने के लिए हर जरूरी कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
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