Manikarnika Ghat: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों और आस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे लोगों की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। इमरान मसूद ने कहा कि मस्जिद, मदरसे या नमाज़ पढ़ने वाले लोगों की गिरफ्तारी जैसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों पर पाबंदी लगाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है।
सांसद ने मोबाइल पर कुछ तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि ये तस्वीरें उनकी नहीं हैं, बल्कि अहिल्याबाई खोलकर चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भेजी गई हैं। तस्वीरों में कथित तौर पर पहले से बने ढांचे और अब वहां खड़े बुलडोजर को दिखाया गया है। मसूद ने आरोप लगाया कि बुलडोजर “लोगों की आस्था पर चलाया जा रहा है” और खंडित मूर्तियां वहां पड़ी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ा जा सकता है और क्या खंडित मूर्तियों को फिर से स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार खंडित मूर्तियों की पुनः स्थापना संभव नहीं होती।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि यदि ज़मीन की आवश्यकता पार्किंग के लिए है, तो अन्य विकल्प क्यों नहीं देखे गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि झंडेवालान में बाबा गोरखनाथ से जुड़े पुराने मंदिर को भी खत्म कर दिया गया। मसूद ने कहा कि “आक्रांत” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर लोगों में नफरत भरी जा रही है, जो समाज के लिए घातक है।
इमरान मसूद ने हरिद्वार के हर की पौड़ी का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि हरिद्वार से आए कई लोगों ने उन्हें बताया है कि वहां भी तोड़फोड़ की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि यदि आरोपों को गलत बताया जा रहा है, तो मौके पर जाकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। इस मामले में उन्होंने भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि उनके बयान इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े हैं, तो उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
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