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70 की हुई मायावती के आगे 2027 चुनाव में काटे ही काटे, अखिलेश बो रहे बीज?

Mayawati 70th Birthday

Mayawati 70th Birthday: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती आज अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। यह दिन सिर्फ केक और बधाइयों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आत्ममंथन का भी है। कांशीराम की विरासत को सत्ता के शिखर तक ले जाने वाली मायावती आज उस दौर में हैं, जहां उनकी पार्टी का सबसे मजबूत आधार जाटव वोट बैंक  धीरे-धीरे खिसकता नजर आ रहा है। ऐसे में 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

सियासी संदेश क्या कह रहा?

हाल ही में कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित बसपा की रैली में भीड़ तो नजर आई, लेकिन उससे ज्यादा चर्चा में रहा मायावती का राजनीतिक तेवर। मंच से उनके सबसे तीखे वार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर दिखे। खासतौर पर अखिलेश यादव को लेकर भाषा काफी आक्रामक रही, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए वही धार नजर नहीं आई। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों से बसपा पर “बीजेपी की बी-टीम” होने का आरोप और मजबूत हुआ है। इस नैरेटिव का सीधा फायदा यूपी की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा को मिलता दिख रहा है।

Mayawati 70th Birthday: लोकसभा में बसपा का सफाया, खतरे की घंटी

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 17 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में इन 17 में से…

* बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं

* समाजवादी पार्टी को 7 सीटें मिलीं

* कांग्रेस और आज़ाद समाज पार्टी को 1-1 सीट

* बसपा का खाता शून्य रहा

यह बसपा के लिए इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि 2019 में पार्टी ने 10 सीटें जीती थीं। पांच साल में शून्य पर पहुंचना पार्टी की जमीन खिसकने का साफ संकेत है।

जाटव वोट बैंक का सपा की ओर झुकाव

मायावती की सबसे बड़ी चिंता सीटों से ज्यादा कोर जाटव वोटरों की नाराजगी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जाटव समुदाय का बड़ा हिस्सा अब सपा के साथ जाता दिख रहा है। 2024 में सपा के दो जाटव उम्मीदवारों की जीत हुई। जिसमें जालौन से नारायण दास अहरिवार और इटावा से जितेंद्र दोहरे है। इस बदलाव की पुष्टि करती है। दूसरी ओर बीजेपी पहले ही गैर-जाटव दलित वोटों में मजबूत पकड़ बना चुकी है, जिससे बसपा की स्थिति और कमजोर हुई है।

Mayawati 70th Birthday: 2007 से शुरू हुआ पतन का सिलसिला

बसपा का स्वर्णिम अध्याय 2007 में लिखा गया था, जब पार्टी ने 30.40% वोट शेयर के साथ 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसके बाद गिरावट लगातार जारी रही।

विधानसभा चुनावों में बसपा का हाल

* 2012: 25.90% वोट, 80 सीटें

* 2017: 22.20% वोट, 19 सीटें

* 2022: 12.90% वोट, सिर्फ 1 सीट

वहीं समाजवादी पार्टी का ग्राफ लगातार ऊपर गया:

* 2017: 21.90% वोट, 47 सीटें

* 2022: 32.10% वोट, 111 सीटें

2022 में बसपा को करीब 10% वोटों का नुकसान हुआ और लगभग उतने ही वोट सपा के खाते में चले गए। वहीं ये आंकड़े साफ बताते हैं कि बसपा का सामाजिक और राजनीतिक आधार तेजी से कमजोर हुआ है।

2027: मायावती के सामने सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

* क्या बसपा जाटव वोट बैंक का भरोसा दोबारा जीत पाएगी?

* क्या पार्टी सिर्फ प्रतीकात्मक राजनीति से निकलकर जमीनी स्तर पर सक्रिय होगी?

* क्या मायावती खुलकर बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभाएंगी?

जन्मदिन के साथ सियासी इम्तिहान

70 साल की उम्र में मायावती ऐसे मोड़ पर खड़ी हैं, जहां कभी सत्ता की चाबी रखने वाली बसपा अब राजनीतिक हाशिए पर नजर आती है। 2027 का विधानसभा चुनाव न सिर्फ पार्टी, बल्कि खुद मायावती के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगा। यह चुनाव बताएगा कि क्या बसपा फिर से उठेगी या इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।

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