Meerut News: मेरठ के डीएम कार्यालय पर आज गुरुवार को दृश्य कुछ अलग ही था। किसानों की भीड़ नारे लगा रही थी झंडे लहरा रही थी और उनके बीच एक डेढ़ फीट के कद के किसान नेता मोहसिन पूरे उत्साह के साथ आंदोलित समूह का नेतृत्व कर रहे थे। तमिलनाडु के किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (म. टिकैत) का यह प्रदर्शन प्रशासन और पुलिस की मनमानी के खिलाफ किसानों के गुस्से की आवाज बन गया।
फर्जी मुकदमों पर भड़के किसान
भाकियू के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय का घेराव करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने की मांग की। किसानों का कहना था कि तमिलनाडु समेत कई राज्यों में किसानों पर फर्जी मामले दर्ज कर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। प्रदर्शन के दौरान किसान एकता जिंदाबाद और फर्जी मुकदमे वापस लो’ जैसे नारे गूंजते रहे।
Meerut News: डेढ़ फीट के मोहसिन लेकिन हौसला सात फीट ऊंचा
इस आंदोलन की असली पहचान बने मेरठ मंडल उपाध्यक्ष मोहसिन, जिनकी लंबाई मात्र डेढ़ फीट है। लेकिन उनके आत्मविश्वास हिम्मत और नेतृत्व ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष का आकार हौसले से तय होता है कद से नहीं। मोहसिन ने मंच से भाषण देते हुए साफ कहा कि जहां किसानों या गरीबों पर अत्याचार होगा हम वहीं खड़े होंगे चाहे कीमत कुछ भी चुकानी पड़े। मोहसिन से प्रभावित होकर सैकड़ों लोग उनके साथ सेल्फी लेने लगे। कई किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष और जीवटता सबके लिए प्रेरणा है। साथी कार्यकर्ताओं के अनुसार, मोहसिन हर आंदोलन को पूरी निष्ठा से जीते हैं और किसानों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए हमेशा सक्रिय रहते हैं।
सैकड़ों आंदोलनों में निभाई अहम भूमिका
मोहसिन केवल आज के आंदोलन की नहीं बल्कि दर्जनों ऐतिहासिक किसान आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं। चाहे गन्ना भुगतान का मामला हो या बिजली दरों का विरोध वे हर बार किसानों की पंक्ति के सबसे आगे खड़े नजर आते हैं। उनकी पहचान अब सिर्फ मेरठ मंडल में नहीं बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के संघर्ष के प्रतीक के रूप में बन चुकी है।
Meerut News: लोकतंत्र के लिए लड़ाई जारी
मोहसिन ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि किसानों की आवाज दबाने के लिए फर्जी मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम किसानों की लड़ाई खेत से लेकर सड़क और दफ्तर तक लड़ेंगे। अगर देश के अन्नदाता को न्याय नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी। प्रदर्शन के बाद जब मोहसिन परिसर से निकले, तो लोग उनकी गाड़ी के पास जुट गए। कोई हाथ मिलाना चाहता था कोई फोटो लेना। उनकी मुस्कुराहट में आत्मविश्वास था और आंखों में बदलाव का सपना। डेढ़ फीट के कद के इस किसान नेता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हौसले का कोई माप नहीं होता।
Report By: यश मित्तल
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