Meerut News: दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख मौलाना मुफ्ती अब्दुल कासिम नोमानी ने धार्मिक शिक्षा के केंद्रों—मदरसों को समाज का पावर हाउस बताकर उनकी भूमिका को एक नई परिभाषा दी है। उनका कहना है कि ये संस्थान सिर्फ़ शिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि वे स्त्रोत हैं जहाँ से निकलने वाली इल्म की रोशनी न केवल व्यक्ति को सही मार्ग दिखाती है बल्कि पूरी मानवता को लाभ पहुँचाती है। मौलाना नोमानी मेरठ के जामिया गुलजारे हुसैनिया अजराड़ा माछरा में आयोजित 106वें वार्षिक जलसे की तीसरी सभा में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
त्याग की नींव पर खड़ी तहज़ीब की विरासत
नोमानी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मदरसों की नींव बड़े बुज़ुर्गों के त्याग और तपस्या से रखी गई थी और उनकी वह रूह भी इन संस्थानों में कायम है। इन मदरसों का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है बल्कि यह तहज़ीब अख़लाक़ और इस्लामी सभ्यता की बुनियाद को मज़बूत करने वाली पाठशालाएँ हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से ज्ञान हासिल करने क़ुरआन और सुन्नत पैगंबर की सुन्नत की राह पर चलने और समाज में शांति तथा भाईचारे को बढ़ावा देने की भावुक अपील की। जामिया के मुहतमिम हकीम मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी ने इस बात को और पुख़्ता किया कि उनका यह वार्षिक जलसा सौ से अधिक वर्षों से सांप्रदायिक एकता और इंसानियत का प्रतीक रहा है जहाँ से हर बार अमन, मोहब्बत और आपसी भाईचारे का पैग़ाम पूरे क्षेत्र में गूँजता है।
Meerut News: इबादत से अनुशासन इल्म से नेतृत्व
दारुल उलूम नदवतुल उलेमा लखनऊ के वरिष्ठ उस्ताद खालिद फैसल ने युवाओं को नमाज़ की पाबंदी और क़ुरआन की तालीम को जीवन का सच्चा आधार बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूजा से जीवन में अनुशासन आता है और आध्यात्मिक सुकून पैदा होता है। उन्होंने नौजवानों के लिए शिक्षा और इबादत के बीच संतुलन बनाने पर विशेष बल दिया। जलसे में मौलाना नोमानी की विद्वत्तापूर्ण यात्रा का भी उल्लेख किया गया। 23 जुलाई 2011 से दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख मुहतमिम के रूप में नेतृत्व कर रहे मौलाना नोमानी शेख अल-हदीस, हदीस, फ़िक़्ह इस्लामी न्यायशास्त्र और तसव्द के बड़े विद्वानों में गिने जाते हैं। उनकी गहरी विद्वत्ता और सादगीपूर्ण नेतृत्व शैली के कारण उन्हें दुनिया के 500 प्रभावशाली मुसलमानों में भी शामिल किया गया है। जलसे का समापन अमन, एकता, और शिक्षा के प्रसार की दुआओं और संकल्प के साथ हुआ।
Report BY: यश मित्तल
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