Mohan Yadav news: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को पड़ोसी राज्य गुजरात के एक दिवसीय दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने कच्छ में आयोजित प्रसिद्ध रण उत्सव में भाग लिया। यह उत्सव अपनी भव्यता, पारंपरिक लोक कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और सफेद रेगिस्तान के अद्भुत दृश्य के लिए विश्वभर में जाना जाता है। रण उत्सव में सहभागिता के बाद मुख्यमंत्री यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इसे किसानों की भागीदारी से बंजर भूमि को पर्यटन और आजीविका के बड़े केंद्र में बदलने का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
किसानों की भागीदारी से बना पर्यटन मॉडल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा,
“मैंने भव्य रण उत्सव में भाग लिया और विश्वस्तरीय टेंट सिटी की व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया। यह इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे किसानों की भागीदारी से बंजर भूमि को पर्यटन, आजीविका और विकास के एक आदर्श में बदला गया है।”
उन्होंने लोक कलाकारों के जीवंत प्रदर्शन और गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यही कारण है कि रण उत्सव को एक विशिष्ट वैश्विक पहचान मिली है।
Mohan Yadav news: प्रधानमंत्री के नेतृत्व में रण उत्सव को मिली वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कच्छ के रण में शुरू हुआ यह उत्सव आज भारत की सांस्कृतिक शक्ति और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री यादव ने भुज में स्थित स्मृति वन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह स्थल भूकंप पीड़ितों की स्मृतियों को संजोए हुए करुणा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
Mohan Yadav news: गैस त्रासदी स्थल पर संग्रहालय की योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार भोपाल में बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के स्थल पर एक समर्पित संग्रहालय विकसित करने की योजना बना रही है। इसी स्थल से 2–3 दिसंबर 1984 को विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक भोपाल गैस त्रासदी हुई थी।
उज्जैन सिंहस्थ 2028 में बनेगी रण उत्सव की तर्ज पर टेंट सिटी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ के दौरान रण उत्सव की तर्ज पर एक टेंट सिटी विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी ऐसी टेंट सिटी विकसित करने की योजना पर काम किया जाएगा, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
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