Muslim Reservation: महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को अहम मोड़ आया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टाल दी है। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय की है।
क्यों टली सुनवाई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता या उनका प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हो सका। इसी वजह से कोर्ट ने मामले पर विस्तृत सुनवाई नहीं की और निर्देश दिया कि अगली तारीख पर याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के जरिए उपस्थित रहें।
Muslim Reservation: क्या है पूरा विवाद
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने फरवरी 2026 में एक शासनादेश जारी कर 2014 के उस फैसले को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया था, जिसमें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदायों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। सरकार का तर्क था कि इस आरक्षण की वैधता पहले ही खत्म हो चुकी थी और इस पर अदालत द्वारा रोक भी लगाई जा चुकी थी।
याचिका में क्या कहा गया
इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया है कि सरकार का कदम संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है और इससे मुस्लिम समुदाय के हित प्रभावित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि इस आरक्षण को अंतरिम राहत के रूप में बहाल रखा जाए।
Muslim Reservation: पहले क्या हुआ था
गौरतलब है कि 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को विशेष पिछड़ा वर्ग (SBC) के तहत 5% आरक्षण दिया था। हालांकि, उसी साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे अमान्य ठहराया था।
आगे क्या होगा
अब 2 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि सरकार का फैसला संवैधानिक है या नहीं। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर छात्रों और नौकरी चाहने वालों में अनिश्चितता बनी हुई है। कुल मिलाकर, यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक संतुलन दोनों के लिहाज से बेहद अहम बन गया है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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