Narendra Modi: अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर प्रधानमंत्री की ओर से हर साल चढ़ाई जाने वाली चादर की परंपरा को लेकर नया कानूनी विवाद सामने आया है। विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह ने इस पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किसी विशेष धार्मिक स्थल पर ऐसी परंपरा निभाना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप नहीं है।
क्या है याचिका का आधार
याचिकाकर्ता का दावा है कि जिस स्थान पर अजमेर की दरगाह स्थित है, वहां पहले संकट मोचन महादेव मंदिर मौजूद था। उनका तर्क है कि इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए सरकार या प्रधानमंत्री द्वारा चादर चढ़ाने की परंपरा पर पुनर्विचार जरूरी है। याचिका में इसे केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पहचान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय बताया गया है।
Narendra Modi: अजमेर कोर्ट में पहले से चल रहा मामला
इस मुद्दे पर अजमेर की सिविल अदालत में भी पहले से मामला विचाराधीन है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने उर्स के दौरान प्रधानमंत्री की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती दी थी। हाल ही में इस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 3 जनवरी तय की है।
उर्स के दौरान राजनीतिक और धार्मिक हलचल
हर साल उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री और अन्य नेता अजमेर दरगाह के लिए चादर भेजते रहे हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अजमेर दौरे की भी जानकारी सामने आई है, जहां अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से चादर पेश की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई पीआईएल के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है, जबकि सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
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