New delhi: भारत सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा किसी भी वैश्विक दबाव से ऊपर है। रूस से तेल आयात को लेकर उठे सवालों पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर लगातार बहस जारी है।
ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं: MEA
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत अपनी ऊर्जा नीति तय करते समय वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते वैश्विक हालात को ध्यान में रखता है। उन्होंने कहा कि भारत का फोकस किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाना है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा लंबे समय तक सुनिश्चित की जा सके। सरकार के सभी फैसले इसी रणनीति के तहत लिए जा रहे हैं।
New delhi: वेनेजुएला ऊर्जा क्षेत्र में पुराना साझेदार
रणधीर जायसवाल ने बताया कि वेनेजुएला भारत का ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से अहम पार्टनर रहा है। भारत ने 2019-20 तक वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात किया था, जिसे बाद में प्रतिबंधों के चलते रोकना पड़ा। इसके बाद 2023-24 में दोबारा तेल खरीद शुरू हुई, लेकिन नए प्रतिबंध लगने के कारण इसे फिर से रोकना पड़ा। उन्होंने साफ किया कि भारत, अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, वेनेजुएला सहित किसी भी देश से कच्चे तेल की कमर्शियल संभावनाओं को परखने के लिए तैयार है।
बाहरी दबाव से तय नहीं होगी भारत की ऊर्जा नीति
New delhi: MEA प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सम्मान करता है, लेकिन अपनी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव के आधार पर तय नहीं करेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है और कुल तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है। इससे पहले भारत की निर्भरता मुख्य रूप से सऊदी अरब और इराक जैसे मध्य-पूर्वी देशों पर थी।
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