NSUI: नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) मध्यप्रदेश इकाई में प्रदेश प्रवक्ता की नियुक्ति को लेकर संगठन के भीतर गंभीर असहमति सामने आई है। नवनियुक्त प्रदेश प्रवक्ता तनय शर्मा की नियुक्ति पर रोक लगाए जाने से जुड़ा लेटर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस लेटर पर राष्ट्रीय मीडिया चेयरमैन रवि पाण्डेय के हस्ताक्षर हैं, वायरल लेटर ने संगठन की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, यह भी गौरतलब है कि वायरल हो रहा नोटिस NSUI मध्यप्रदेश के किसी भी आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा नहीं किया गया है, जिससे भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। संगठन के भीतर इसे लेकर अलग-अलग दावे और चर्चाएं चल रही हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में राजस्थान में भी नियुक्तियों को लेकर विवाद उजागर हुआ और प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
NSUI के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्यप्रदेश प्रभारी साहिल शर्मा ने क्या कहा?
मध्यप्रदेश में दो प्रभारी नियुक्त हैं। तनय शर्मा की नियुक्ति की जानकारी हमें नहीं थी, इसलिए उस पर फिलहाल रोक लगाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल्द ही इस संबंध में पत्र को संगठन के आधिकारिक हैंडल से साझा किया जाएगा। साथ ही, आगे इस मामले में एक समिति गठित किए जाने की संभावना भी है।
आपसी खींचतान के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्र तनय भी संगठन का हिस्सा हैं और जो भी निर्णय समिति द्वारा लिया जाएगा, उसका सभी को पालन करना होगा।” “वायरल हो रहे लेटर पर प्रतिक्रिया लेने के लिए राष्ट्रीय मीडिया चेयरमैन रवि पाण्डेय से समर्पक किया तो उन्होंने खबर इंडिया का दो बार फोन कट कर दिया” इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए तनय शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका।

एबीवीपी के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कसा तंज
एनएसयूआई में खींचतान कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह इसकी पुरानी परंपरा रही है। यह स्थिति केवल आज की नहीं, बल्कि समय-समय पर सामने आती रही है। कांग्रेस और उसके छात्र संगठन में व्यक्तिकेंद्रित राजनीति का प्रभाव भी जगजाहिर है। एनएसयूआई, कांग्रेस का ही एक अंग है, इसलिए इसमें दलगत राजनीति का प्रभाव दिखाई देना कोई असामान्य बात नहीं है। छात्र संगठनों का उद्देश्य समाज और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाना होता है, और उसी क्रम में वे दलगत राजनीति को आगे बढ़ाते हैं।
संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह विवाद केवल एक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय और निर्णय प्रक्रिया को लेकर गहरे मतभेदों को उजागर करता है। सोशल मीडिया पर वायरल लेटर और आधिकारिक हैंडल्स की चुप्पी ने इस विवाद को और हवा दी है। फिलहाल, NSUI के शीर्ष नेतृत्व की ओर से आने वाले अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि यह विवाद थमता है या संगठन के भीतर की खींचतान और तेज होती है।
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