Operation Sindoor: जयपुर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है और यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक आतंकवादी सोच पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती। गुरुवार को जयपुर में सेना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आतंक के खिलाफ भारत का यह संघर्ष शांति और मानवता की रक्षा के लिए है।
जानिए किसका प्रतीक बना ऑपरेशन सिंदूर
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह सोच-समझकर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई। उन्होंने इसे भारत के इतिहास में केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि साहस और संतुलन का प्रतीक बताया। रक्षा मंत्री ने सेना के जवानों को उनके शौर्य और समर्पण के लिए बधाई भी दी।
Operation Sindoor: संकल्प और आत्ममंथन का अवसर
उन्होंने कहा कि 15 जनवरी भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और आत्ममंथन का अवसर है, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्होंने सैनिक के कर्तव्य को ‘यज्ञ’ और युद्धभूमि को ‘यज्ञशाला’ के रूप में परिभाषित किया।
विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना केवल सैन्य बल नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का मजबूत स्तंभ है। सेना में पूरे देश की झलक दिखाई देती है, जो सामाजिक एकता को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि जनता और सेना के बीच पारस्परिक विश्वास ही भारत की सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है।
Operation Sindoor: महिलाओं की भूमिका बढ़ाने पर जोर
राजनाथ सिंह ने बताया कि 2021 से एनडीए में लड़कियों का प्रवेश शुरू होना ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को सशस्त्र बलों में समान अवसर देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शॉर्ट सर्विस कमीशन से स्थायी कमीशन की व्यवस्था को भी उन्होंने जेंडर इक्वेलिटी की दिशा में बड़ा कदम बताया।
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