Pakistan News: पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित एक एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) ने मंगलवार को एक बार फिर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान और उनके दो जमानतदारों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए। यह कार्रवाई नवंबर 2024 में इस्लामाबाद में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में की गई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने अलीमा खान के खिलाफ वारंट लागू न करने पर एसपी रावल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अलीमा खान को गिरफ्तार कर 4 फरवरी को बिना किसी लापरवाही के अदालत में पेश किया जाए।
जमानतदारों के खिलाफ भी सख्त रुख
अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अलीमा खान के दो जमानतदारों नदीम बिलाल और वाहिद महमूद के खिलाफ भी गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। साथ ही एसपी रावल को आदेश दिया गया है कि दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अलीमा खान को पेशी से छूट देने का उनका आवेदन पहले ही खारिज किया जा चुका है, इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होना गंभीर लापरवाही है।
Pakistan News: 24 नवंबर 2024 के प्रदर्शन से जुड़ा मामला
यह मामला सादिकाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था और 24 नवंबर 2024 को इस्लामाबाद के डी-चौक पर हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान ने 13 नवंबर 2024 को इस विरोध को लेकर ‘अंतिम आह्वान’ किया था। प्रदर्शन में पार्टी के चुनावी जनादेश की बहाली, हिरासत में लिए गए PTI नेताओं की रिहाई और 26वें संवैधानिक संशोधन को रद्द करने की मांग की गई थी। प्रदर्शन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से PTI समर्थक डी-चौक पहुंचे थे। इसके जवाब में सरकार ने सुरक्षा अभियान चलाया, जिसके बाद PTI नेतृत्व मौके से हट गया और 26 नवंबर को आंदोलन समाप्त हो गया।
Pakistan News: इमरान खान पहले से जेल में
गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद से वे भ्रष्टाचार और आतंकवाद समेत कई मामलों का सामना कर रहे हैं।
PTI ने सिंध हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
इस बीच, PTI ने कराची और सिंध के अन्य हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित गिरफ्तारी को लेकर सिंध हाईकोर्ट का रुख किया है। अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, PTI का आरोप है कि एमपीओ अध्यादेश के तहत की गई छापेमारी में करीब 180 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि, सिंध सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। PTI नेताओं ने अदालत से एमपीओ के तहत जारी आदेश को अवैध घोषित करने और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है।
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