Pakistani Serial: मनोरंजन के नाम पर देखे जा रहे पाकिस्तानी टीवी सीरियल अब कुछ मुस्लिम परिवारों में गंभीर पारिवारिक टकराव की वजह बनते जा रहे हैं। आरोप है कि इन धारावाहिकों की कहानी रिश्तो में शक, असंतोष और तुलना की भावना भर रही है, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ रहा है और घरों का माहौल बिगड़ रहा है।
पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर रोक लगाए जाने की मांग
इस मुद्दे को उठाते हुए देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन मुस्लिम महासभा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारत में टीवी और यूट्यूब चैनलों पर प्रसारित हो रहे पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर रोक लगाई जाए। संगठन का कहना है कि इन सीरियलों का सामाजिक प्रभाव नकारात्मक है और यह भारतीय मुस्लिम समाज की पारंपरिक संरचना को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
Pakistani Serial: भारत में प्रभाव तेजी से बढ़ रहा
मुस्लिम महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हाजी नाजिम खान के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में भारत में पाकिस्तानी धारावाहिकों को देखने का चलन तेजी से बड़ा है। कई परिवार रोजाना सामूहिक रूप से इन सीरियलों को देखते हैं, जिनमें रिश्तों में ईर्ष्या, बहुविवाह, धोखा और पारिवारिक संघर्ष जैसे विषयों को प्रमुखता से दिखाया जाता है। उन्होंने बताया कि ‘जलन’ और ‘मन मस्त मलंग’ जैसे धारावाहिकों को पाकिस्तान में भी विवादों का सामना करना पड़ा है। वहां की मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी इन पर अस्थाई रूप से बैन लगा चुकी है। इसके बावजूद भारत में इनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
संगठन का दावा है कि ऐसे सीरियल सामाजिक मूल्यों के खिलाफ संदेश देते हैं और युवाओं पर विशेष रूप से गलत असर डाल रहे हैं। हाजी नाजिम के मुताबिक “मेरा हमसफर”, “कैसी तेरी खुदगर्जी”, “इश्क मुर्शिद” और “मुझे प्यार हुआ था” जैसे धारावाहिक भी घरेलू रिश्ता में असंतुलन पैदा कर रहे हैं। मुस्लिम महासभा का कहना है कि जहां भारतीय मुस्लिम समाज में दूसरी शादी से परहेज की प्रवृत्ति बड़ी है, वहीं इन सीरियलों में दिखाई जाने वाली जीवनशैली भ्रम और संतोष को जन्म दे रही है। संगठन ने मुस्लिम परिवारों से ऐसे कंटेंट से दूरी बनाने और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
Report By: विभु मिश्रा
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