PARLIAMENT NEWS: राज्यसभा में वंदे मातरम् के 150वें वर्ष पर हुई चर्चा गुरुवार को राजनीतिक टकराव में बदल गई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐतिहासिक निर्णयों पर कांग्रेस नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बने वंदे मातरम् के साथ जो हुआ, उसका असर देश की दिशा और विभाजन तक पर पड़ा।
नेहरू ने 1937 में वंदे मातरम् के दो टुकड़े किए : शाह
अमित शाह ने दावा किया कि 1937 में वंदे मातरम् की स्वर्ण जयंती के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने गीत को सिर्फ दो अंतरों तक सीमित कर दिया। शाह के अनुसार, “यही वह क्षण था जब तुष्टीकरण की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन का रास्ता तैयार किया।” उन्होंने कहा कि अगर वंदे मातरम् को नहीं काटा जाता, तो “आज भारत एक पूर्ण, अविभाजित राष्ट्र होता।”
PARLIAMENT NEWS: आपातकाल और वंदे मातरम् का संदर्भ
गृहमंत्री ने आपातकाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी शासनकाल में वंदे मातरम् बोलने वालों को जेल भेजा गया। “जब गीत के 100 वर्ष पूरे हुए, तब पूरा देश बंदी बनाया गया,” उन्होंने कहा। शाह ने यह भी जोड़ा कि आज जब संसद में 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा हो रही है, कांग्रेस नेतृत्व इस पर बहस से दूर बैठा है।
PARLIAMENT NEWS: कांग्रेस के डीएनए में वंदे मातरम् का विरोध
सदन में विपक्षी दलों के विरोध के बीच शाह ने कहा कि कांग्रेस ने इस गीत को हमेशा संदेह की निगाह से देखा, जबकि रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर महात्मा गांधी तक ने इसे राष्ट्र की आत्मा बताया।
आज़ादी आंदोलन से ओलंपिक तक वंदे मातरम् की गूंज
शाह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि श्यामजी कृष्ण वर्मा, वीर सावरकर और भीकाजी कामा द्वारा बनाए गए झंडे पर भी “वंदे मातरम्” अंकित था।
उन्होंने कहा कि 1936 बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को प्रेरणा के रूप में यही गीत गाया गया था, जिसके बाद भारत ने स्वर्ण पदक जीता। अमित शाह ने याद दिलाया कि 1992 में भाजपा नेता राम नाइक और लालकृष्ण आडवाणी के प्रयासों से लोकसभा ने सर्वसम्मति से वंदे मातरम् का गान फिर शुरू किया।
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