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संसदीय समिति ने पेन–पेपर मोड की सिफारिश की, एनटीए के प्रदर्शन पर उठाए गंभीर सवाल

शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल मामलों की संसदीय समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता जताते हुए सिफारिश की है कि देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को पेन-एंड-पेपर मोड में वापस लाने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

PARLIAMENT NTA NEWS: शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल मामलों की संसदीय समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के प्रदर्शन पर गंभीर चिंता जताते हुए सिफारिश की है कि देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को पेन-एंड-पेपर मोड में वापस लाने पर गंभीरता से विचार किया जाए। समिति का कहना है कि सीबीटी (कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं) में बढ़ती तकनीकी खामियां और सुरक्षा जोखिम परीक्षार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।

एनटीए की 2024 की परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2024 में आयोजित 14 परीक्षाओं में से कम से कम 5 में बड़ी समस्याएं सामने आईं। यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट और नीट-पीजी को बीच में ही टालना पड़ा। नीट-यूजी में पेपर लीक के आरोप लगे। सीयूईटी (यूजी/पीजी) के परिणाम रोकने पड़े। समिति ने कहा कि इस तरह की घटनाएं परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार हैं।

PARLIAMENT NTA NEWS: जेईई-मेन 2025 में 12 सवाल वापस

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जनवरी 2025 में आयोजित जेईई-मेन परीक्षा की फाइनल आंसर-की में कम से कम 12 सवाल हटाने पड़े, जिससे लाखों छात्रों की उम्मीदें और तनाव प्रभावित हुआ।

PARLIAMENT NTA NEWS: पेन-पेपर मोड को बताया ज़्यादा सुरक्षित

समिति ने कहा कि कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं जैसे सीबीएसई बोर्ड और यूपीएससी सालों से पेन-एंड-पेपर मोड में “लीक-प्रूफ” तरीके से संचालित होती रही हैं। इसलिए प्रवेश परीक्षाओं में भी इस मॉडल पर अधिक भरोसा किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई कि यदि सीबीटी जारी रहे तो परीक्षाएं केवल सरकारी या सरकारी नियंत्रण वाले केंद्रों पर ही आयोजित की जाएं, न कि निजी केंद्रों पर, जहां सुरक्षा चूक की संभावना अधिक रहती है।

 एनटीए को अपना काम सुधारना होगा

समिति ने कहा कि एनटीए को तुरंत अपनी प्रक्रिया, सुरक्षा और तकनीकी ढांचे में सुधार करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियां न हों और परीक्षार्थियों का सिस्टम पर भरोसा बहाल हो सके।

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