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9 फरवरी को तीन बड़े पर्वों का संयोग, भैरव अष्टमी और जन्माष्टमी का पुण्य अवसर

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को तीन धार्मिक पर्व एक साथ मनाए जाते हैं। इस दिन पूजा, व्रत, जागरण और शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व बताया गया है।
तीन पर्वों का महत्व

Phalgun Krishna Ashtami: सोमवार, 9 फरवरी को फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। यह तिथि पूरी रात तक रहेगी। इस दिन तीन महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व एक साथ पड़ रहे हैं, इसलिए इसका खास महत्व माना जा रहा है। इन पर्वों में भैरव अष्टमी या कालाष्टमी, जानकी जन्मोत्सव और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शामिल हैं। इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और रात में जागरण भी करते हैं।

काल भैरव पूजा और व्रत का विशेष फल

भैरव अष्टमी, जिसे कालाष्टमी भी कहा जाता है, हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। भक्त इस दिन उपवास रखकर विशेष पूजा करते हैं। मान्यता है कि काल भैरव की पूजा से भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है और जीवन की बाधाएं कम होती हैं।

Phalgun Krishna Ashtami: तीन पर्वों का महत्व
तीन पर्वों का महत्व

Phalgun Krishna Ashtami: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

इसी दिन जानकी जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। यह पर्व माता सीता के जन्म की खुशी में मनाया जाता है और इसे सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इसके साथ ही इस दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी पड़ रही है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण जैसे ग्रंथों में इस तिथि के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस दिन भक्त लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और रात भर जागरण कर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहते हैं। माना जाता है कि इससे जीवन में सुख, शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

दृक पंचांग के अनुसार, सोमवार को विशाखा नक्षत्र पूरी रात तक रहेगा। वृद्धि योग 10 फरवरी की रात 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। करण की बात करें तो बालव करण शाम 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इसके बाद कौलव करण पूरी रात तक रहेगा। इस दिन चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेगा। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 4 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 7 मिनट पर होगा।

तीन पर्वों का महत्व
तीन पर्वों का महत्व

शुभ मुहूर्त और अशुभ समय की जानकारी

अगर शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल रात 10 बजकर 4 मिनट से 11 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 8 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है। गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा आडल योग पूरे दिन रहेगा, इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।

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