RAM MANDIR NEWS: मथुरा-ज्ञानवापी विवाद पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अधिकारी केके मुहम्मद के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। मुहम्मद का कहना है कि ऐतिहासिक धार्मिक विवादों का स्थायी हल अदालतों या टकराव से नहीं, बल्कि दोनों समुदायों के शीर्ष नेतृत्व की आपसी सहमति से निकल सकता है। उनके मुताबिक, यदि बातचीत सौहार्द और पारदर्शिता के साथ हो, तो ऐसे विवादों में तनाव कम किया जा सकता है।
दो स्थलों पर समाधान का सुझाव
मुहम्मद ने सुझाव दिया कि मुस्लिम समुदाय यदि मथुरा और ज्ञानवापी जैसे दो स्थलों पर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए, तो यह आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द को मजबूत कर सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समुदाय को अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद किसी अन्य धार्मिक ढांचे पर विवाद आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, ताकि तनाव और बढ़ने से रोका जा सके।
RAM MANDIR NEWS: बाहरी हस्तक्षेप के कारण संभव नहीं
केके मुहम्मद ने कहा कि दोनों समुदायों के बीच होने वाले संवाद को राजनीतिक एजेंडों और वैचारिक ध्रुवीकरण से दूर रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, कुछ इतिहासकार और राजनीतिक समूह पहले भी ऐसे विवादों को उलझा चुके हैं, जिससे समाधान की प्रक्रिया कठिन हो जाती है। उन्होंने दावा किया कि अतीत में कई मुस्लिम प्रतिनिधि बातचीत के ज़रिए समाधान के लिए तैयार थे, लेकिन बाहरी हस्तक्षेप के कारण यह संभव नहीं हो सका।
RAM MANDIR NEWS: बयान के बाद फिर चर्चा में आए मुहम्मद
केरल के कोझिकोड में रहने वाले 73 वर्षीय मुहम्मद का कहना है कि बाबरी मस्जिद खुदाई के निष्कर्ष सार्वजनिक करने के बाद से उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका नया बयान ऐसे समय में आया है जब धार्मिक मुद्दे चुनावी माहौल में भी खूब चर्चा का केंद्र बने हुए हैं और हर टिप्पणी राजनीतिक तौर पर अहम मानी जा रही है।
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