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लेह हिंसा केस में बड़ा फैसला: सोनम वांगचुक पर लगा NSA खत्म, 170 दिन बाद जेल से निकलने का रास्ता साफ

केंद्र सरकार ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम हटाने का निर्णय लिया है। करीब 170 दिन से जोधपुर जेल में बंद वांगचुक की अब रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
सोनम वांगचुक को बड़ी राहत, 170 दिन बाद हटाया गया NSA

Sonam Wangchuk: लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने उनके ऊपर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटाने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होगा। इस फैसले के बाद करीब साढ़े पांच महीने से चल रही उनकी हिरासत खत्म होने का रास्ता साफ हो गया है। वांगचुक सितंबर 2025 से जोधपुर जेल में बंद थे और अब लगभग 170 दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकती है। सरकार का कहना है कि उन्होंने NSA के तहत तय हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है, इसलिए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।

लेह हिंसा के बाद गिरफ्तारी

दरअसल, लद्दाख प्रशासन ने 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया था। इससे दो दिन पहले यानी 24 सितंबर 2025 को लेह में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि इस हिंसा को भड़काने में वांगचुक की भूमिका रही। इसी आधार पर उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर जेल में भेज दिया गया था।

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक को बड़ी राहत, 170 दिन बाद हटाया गया NSA
सोनम वांगचुक को बड़ी राहत, 170 दिन बाद हटाया गया NSA

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) एक ऐसा कानून है जिसके तहत सरकार विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए हिरासत में रख सकती है। यदि प्रशासन को लगता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय हित को खतरा हो सकता है, तो उसे इस कानून के तहत हिरासत में लिया जा सकता है। इस कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है, हालांकि सरकार समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करके हिरासत को समाप्त भी कर सकती है।

Sonam Wangchuk: राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांग

सितंबर 2025 में लद्दाख में चल रहा आंदोलन अचानक हिंसक हो गया था। दरअसल, लद्दाख के लोग काफी समय से दो मुख्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे पहली, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए और दूसरी, क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा मिले। इन मांगों को लेकर पूरे सितंबर महीने में लगातार प्रदर्शन और धरने हो रहे थे। आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी। 10 सितंबर 2025 को आंदोलनकारियों ने भूख हड़ताल और अनशन शुरू किया था। इसके बाद 23 सितंबर को अनशन कर रहे दो लोगों की अचानक तबीयत खराब हो गई, जिससे पूरे इलाके में माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

लेह बंद हिंसा में 4 मौतें

24 सितंबर 2025 को लद्दाख में बंद का आह्वान किया गया था। उस दिन हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हो गया। दोपहर करीब एक बजे के आसपास स्थिति अचानक हिंसक हो गई। हिंसा के दौरान सुरक्षाबलों की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, स्थानीय भाजपा कार्यालय में भी आगजनी की गई और कई जगहों पर पत्थरबाजी हुई। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हो गए।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई स्थानों पर लाठीचार्ज भी किया गया। इस दौरान 10 से 12 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने पूरे लेह शहर में कर्फ्यू लागू कर दिया था।

सोनम वांगचुक को बड़ी राहत, 170 दिन बाद हटाया गया NSA
सोनम वांगचुक को बड़ी राहत, 170 दिन बाद हटाया गया NSA

लद्दाख आंदोलन का प्रमुख चेहरा वांगचुक

सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वांगचुक खास तौर पर लद्दाख के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर विकास का मॉडल तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

लद्दाख में चल रहे आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक एक प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए थे। उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों से कहा था कि लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है। हालांकि प्रशासन का कहना था कि उनके भाषण और आह्वान के कारण प्रदर्शन का माहौल उग्र हुआ, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।

170 दिन बाद वांगचुक को राहत

गिरफ्तारी के बाद सोनम वांगचुक को लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर जेल में भेज दिया गया था और पिछले करीब साढ़े पांच महीने से वे वहीं बंद थे। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने उनकी रिहाई की मांग भी उठाई थी। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार ने स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत तय हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कानून हटाने का निर्णय लिया गया है।

NSA हटने के बाद अब सोनम वांगचुक की रिहाई की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की स्थिति क्या है और रिहाई के बाद उन्हें किन शर्तों का पालन करना होगा।

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