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सोनिया गांधी की नागरिकता पर उठते सवाल: राजनीति का पुराना विवाद फिर सुर्खियों में

भारतीय राजनीति में सोनिया गांधी की नागरिकता का मुद्दा एक ऐसा विषय है, जो समय-समय पर फिर से उभर आता है। ताज़ा राजनीतिक बयानबाज़ी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।

Sonia Gandhi citizenship issue: भारतीय राजनीति में सोनिया गांधी की नागरिकता का मुद्दा एक ऐसा विषय है, जो समय-समय पर फिर से उभर आता है। ताज़ा राजनीतिक बयानबाज़ी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में मौजूद सोनिया गांधी पर विदेशी मूल से जुड़े आरोप पिछले कई वर्षों में कई बार उठे हैं, लेकिन हर बार की तरह यह बहस इस बार भी राजनीतिक गलियारों तक सीमित दिखाई दे रही है।

विदेशी मूल से भारतीय राजनीति के केंद्र तक

इटली में जन्मी सोनिया गांधी 1960 के दशक में भारत आईं और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से विवाह के बाद उन्होंने भारतीय नागरिकता ग्रहण की। कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी ने यह नागरिकता पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ली और उनकी स्थिति पर संदेह उठाना केवल राजनीतिक एजेंडा को साधने का प्रयास है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, नागरिकता से जुड़े सभी दस्तावेज़ संबंधित प्राधिकरणों के पास मौजूद हैं और उन पर कभी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।

Sonia Gandhi citizenship issue: विपक्ष की आपत्तियां 

Sonia Gandhi citizenship issue
Sonia Gandhi citizenship issue

विपक्ष विशेषकर भाजपा के कुछ नेता लंबे समय से सोनिया गांधी के नागरिकता दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनके अनुसार, विदेशी मूल का मुद्दा देश की शीर्ष राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनता है और जनता को इस संबंध में पारदर्शिता प्राप्त होना चाहिए। हालांकि, ये आरोप अधिकतर राजनीतिक बयानों तक सीमित रहे हैं और अदालतों ने इस विषय पर दायर याचिकाओं को बार-बार खारिज किया है।

कानूनी पक्ष: स्थिति स्पष्ट

नागरिकता कानूनों के जानकारों का कहना है कि भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए जो प्रक्रियाएँ निर्धारित हैं, सोनिया गांधी ने उन्हीं का पालन किया था। उनके खिलाफ नागरिकता से जुड़े किसी भी पहलू पर अब तक न तो कोई कानूनी चुनौती टिक पाई है और न ही अदालतों ने किसी प्रकार की अनियमितता के संकेत पाए हैं। इसीलिए विशेषज्ञ इस विवाद को कानूनी से अधिक राजनीतिक मानते हैं।

चुनावी माहौल और पुरानी बहसों की वापसी

सियासी विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी मौसम या राजनीतिक तनाव बढ़ने पर पुराने मुद्दे अचानक फिर से सुर्खियों में आ जाते हैं। सोनिया गांधी की नागरिकता भी ऐसा ही विषय है, जिसे राजनीतिक लाभ के लिए समय-समय पर उठाया जाता है। कांग्रेस इसे भाजपा की रणनीति बताती है, जबकि विपक्ष इसे जनता को जागरूक करने के लिए आवश्यक मानता है।

 विवाद ज्यादा, ठोस आधार कम

सोनिया गांधी की नागरिकता को लेकर उठ रहा विवाद भारतीय राजनीति का पुराना और बार-बार दोहराया जाने वाला अध्याय है। कानूनी स्थिति स्पष्ट है और अदालतें इस मुद्दे को पहले भी आधारहीन बता चुकी हैं। इसके बावजूद राजनीतिक बयानबाज़ी और चुनावी रणनीति इस विषय को बार-बार चर्चा में ला देती है। कुल मिलाकर यह बहस अभी भी राजनीतिक तकरार तक सीमित है, जबकि ठोस तथ्य या कानूनी चुनौती सामने नहीं दिखाई देती।

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