Soya Chaap: उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद की पहचान अब सिर्फ इंजीनियरिंग सामान या हॉकी तक ही नहीं रहेगी। अब शहर के चटपटे सोया चाप को भी पूरी दुनिया में पहचान मिलने वाली है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना शुरू करने जा रही है, और इसमें गाजियाबाद की तरफ से ‘सोया चाप’ का नाम पक्का हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी महीने इस स्कीम को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
सोया चाप का काम तेजी से फैला
पिछले 10 सालों में गाजियाबाद में सोया चाप का काम बहुत तेजी से फैला है। चाहे गली-मोहल्ले की रेहड़ी हो या बड़े रेस्टोरेंट और शादियां, हर जगह चाप छात्रों की पहली पसंद बनी हुई है। जिसके चलते इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। इसी को भुनाते हुए अब गाजियाबाद की इस चाप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में कदम उठाया गया है। जिला उद्योग केंद्र के संयुक्त आयुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि इस योजना का असली मकसद यहां के जायके को ग्लोबल लेवल पर ले जाना है, जिससे स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों को फायदा होगा और लोगों को काम भी मिलेगा।
Soya Chaap: लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं
शहर के चाप विक्रेता तरुण मदान का कहना है कि गाजियाबाद में रोजाना करीब 3 हजार किलो चाप की खपत है। मार्केट में असली चाप के साथ-साथ मिलावटी और मैदे वाली चाप का भी बड़ा खेल चल रहा है। असली चाप जहां 100-120 रुपये किलो बिकती है, वहीं नकली माल 60-80 रुपये में मिल रहा है। इस खुशखबरी के साथ एक चिंता की बात भी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नकली या मिलावटी चाप का ज्यादा समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। उनका मानना है कि सरकार को इस पहचान के साथ-साथ शुद्धता पर भी ध्यान देना होगा ताकि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।
Report BY: विभु मिश्रा
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