Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में लावारिस कुत्तों से जुड़ी समस्या पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रुख अपनाया। एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके इलाके में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते हैं, जो रातभर शोर मचाते हैं और लोगों की नींद व बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया।
स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अधिकारी केवल वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन तक सीमित कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा। उनका तर्क था कि स्टरलाइजेशन के बाद कुत्तों को दोबारा उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है।
Supreme Court: प्रशांत भूषण के सुझाव पर अदालत की टिप्पणी
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि एक पारदर्शी सिस्टम होना चाहिए, जिसमें लोग उन कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जिनका स्टरलाइजेशन नहीं हुआ है और किसी विशेष अथॉरिटी को उस पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि फिर तो “हम कुत्तों से सर्टिफिकेट लेकर चलने को भी कह सकते हैं।” इस टिप्पणी पर कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली।
पॉडकास्ट पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मानव सुरक्षा, एबीसी नियमों के पालन और पशु अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से मामले की गंभीरता से सुनवाई कर रहा है।







