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1 गलती और बढ़ सकता है शुगर लेवल: जानिए डायबिटीज में आलू या शकरकंद, कौन है असली दोस्त?

भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है, इसलिए सही आहार चुनना जरूरी है। यह लेख बताता है कि आलू और शकरकंद में से कौन ब्लड शुगर के लिए बेहतर है। साथ ही ग्लाइसेमिक सूचकांक, फाइबर और सही मात्रा में सेवन के महत्व को भी सरल भाषा में समझाया गया है।
डायबिटीज में आलू या शकरकंद

Sweet Potato Diabetes: भारत में डायबिटीज अब बहुत आम हो चुकी है। देश में करोड़ों लोग इस बीमारी से परेशान हैं या फिर उनका ब्लड शुगर अक्सर कंट्रोल में नहीं रहता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि रोज खाने में क्या शामिल करें और क्या नहीं। खासकर आलू और शकरकंद को लेकर लोगों के मन में काफी भ्रम है। कुछ लोग आलू को पूरी तरह नुकसानदेह मानते हैं, तो कुछ शकरकंद को बहुत फायदेमंद बताते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि डायबिटीज में किसी भी चीज को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं होता, बल्कि समझदारी से खाना ज्यादा अहम है।

डायबिटीज में आलू या शकरकंद
डायबिटीज में आलू या शकरकंद

ग्लाइसेमिक इंडेक्स और शुगर नियंत्रण

ब्लड शुगर इस बात पर निर्भर करता है कि कोई भी भोजन शरीर में कितनी तेजी से पचकर ग्लूकोज में बदलता है और खून में पहुंचता है। इसी माप को ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहा जाता है। जिन खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, वे शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इसी वजह से आलू और शकरकंद की तुलना करना जरूरी हो जाता है।

आलू को अक्सर डायबिटीज के लिए खराब माना जाता है, लेकिन सभी आलू एक जैसे नहीं होते। भारत में आलू की कई किस्में उगाई जाती हैं और हर किस्म का असर शरीर पर अलग हो सकता है। कुछ किस्मों में ऐसा स्टार्च होता है जो धीरे-धीरे टूटता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। शोध से पता चलता है कि अगर सही किस्म का आलू चुना जाए और उसे सही तरीके से पकाया जाए, तो सीमित मात्रा में खाने से ज्यादा नुकसान नहीं होता। दिक्कत तब होती है जब आलू को तला जाए या बहुत ज्यादा मसाले और तेल के साथ खाया जाए।

डायबिटीज में आलू या शकरकंद
डायबिटीज में आलू या शकरकंद

Sweet Potato Diabetes: उबला आलू और शकरकंद का शुगर पर असर

उबला हुआ आलू भी अगर जरूरत से ज्यादा खा लिया जाए, तो शुगर बढ़ सकती है क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है। हालांकि, अगर उबले हुए आलू को ठंडा कर लिया जाए तो उसमें मौजूद स्टार्च का स्वरूप कुछ बदल जाता है, जिससे उसका असर थोड़ा बेहतर हो सकता है।

अब बात करें शकरकंद की। लोग अक्सर इसे डायबिटीज में सुरक्षित विकल्प मानते हैं। शकरकंद स्वाद में मीठा जरूर होता है, लेकिन इसकी मिठास शरीर पर अलग तरीके से असर डालती है। इसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो शुगर को धीरे-धीरे खून में पहुंचने देता है। इसी कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स आमतौर पर आलू से कम होता है। इसके अलावा, शकरकंद में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं और इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बना सकते हैं। आयुर्वेद में भी शकरकंद को ऊर्जा देने वाला और पाचन के लिए संतुलित माना गया है, लेकिन मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

Sweet Potato Diabetes:  डायबिटीज में आलू या शकरकंद
डायबिटीज में आलू या शकरकंद

संतुलित आहार से शुगर नियंत्रण संभव

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का लक्ष्य ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना है, तो शकरकंद अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हो सकता है। फिर भी, अगर इसे बहुत ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शुगर बढ़ा सकते हैं। वहीं, आलू को पूरी तरह छोड़ना भी जरूरी नहीं है। यदि आलू उबला हुआ हो और उसे दाल व हरी सब्जियों के साथ संतुलित मात्रा में खाया जाए, तो उसे आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।

डायबिटीज के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाली संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च भी यही सलाह देती है कि संतुलित भोजन, सही मात्रा और नियमित दिनचर्या अपनाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है।

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