ख़बर का असर

Home » स्वास्थ्य » Triphala benefits: वात दोष के लिए त्रिफला है लाभकारी, जानें सेवन का सही तरीका

Triphala benefits: वात दोष के लिए त्रिफला है लाभकारी, जानें सेवन का सही तरीका

वात दोष के बढ़ने से शरीर और मन दोनों प्रभावित होते हैं। त्रिफला एक प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है, जो वात को संतुलित करने में सहायक होती है। सही विधि और उचित समय पर सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है, कब्ज दूर होती है और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
त्रिफला से वात दोष पर नियंत्रण

Triphala benefits: मानव शरीर के सुचारू संचालन के लिए तीन दोषों वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। सर्दियों के मौसम में स्वाभाविक रूप से वात दोष की वृद्धि होती है, जिससे जोड़ों में दर्द, पेट से जुड़ी समस्याएं और हड्डियों से संबंधित बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक आयुर्वेदिक औषधि वात दोष को संतुलित करने में मदद कर सकती है? हम बात कर रहे हैं त्रिफला की, जो केवल पेट संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं करती, बल्कि वात को संतुलित करने में भी सहायक होती है। हालांकि, इसके सेवन का सही तरीका जानना भी बेहद जरूरी है।

Triphala benefits: त्रिफला से वात दोष पर नियंत्रण
त्रिफला से वात दोष पर नियंत्रण

Triphala benefits: वात वृद्धि को रोकने में सहायक

आयुर्वेद के अनुसार, यदि वात की वृद्धि को रोकना है तो त्रिफला का सेवन वसा के साथ करना अधिक लाभकारी माना जाता है। वसा के साथ त्रिफला तेजी से प्रभाव दिखाता है, जैसे घी के साथ इसका सेवन। इसके लिए रात में एक गिलास गुनगुने पानी में आधा से एक चम्मच त्रिफला चूर्ण और शुद्ध देसी गाय का घी मिलाकर सेवन करना चाहिए। इससे आंतों में चिकनाहट बढ़ती है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

दूसरा तरीका है ‘त्रिफला घृत’। आयुर्वेद में इसे एक प्रभावी औषधि माना गया है, जिसमें घी को विभिन्न औषधियों के साथ पकाया जाता है। यदि आप बढ़ते वात दोष से परेशान हैं, तो रात के समय ‘त्रिफला घृत’ का सेवन कर सकते हैं। यह न केवल वात को संतुलित करता है, बल्कि पेट से जुड़ी बीमारियों में भी राहत प्रदान करता है।

त्रिफला से वात दोष पर नियंत्रण
त्रिफला से वात दोष पर नियंत्रण

सेवन से बढ़ती है आंतों की गतिशीलता

तीसरा तरीका अरंडी के तेल के साथ त्रिफला का सेवन करना है। जब वात दोष बढ़ता है, तो कब्ज की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में अरंडी के तेल की कुछ बूंदें त्रिफला चूर्ण के साथ मिलाकर पानी के साथ ली जा सकती हैं। इससे आंतों की गतिशीलता बढ़ती है और कब्ज में राहत मिलती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि सर्दियों में शाम और रात के समय प्राकृतिक रूप से वात दोष बढ़ने लगता है, इसलिए रात का भोजन करने के लगभग दो घंटे बाद त्रिफला का सेवन करना अधिक लाभकारी माना जाता है।

वात दोष की वृद्धि से शरीर में जकड़न, कब्ज, तनाव, नींद न आने की समस्या, जोड़ों में दर्द, बेचैनी और शरीर में कंपन जैसी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। यह मानसिक थकान के साथ-साथ शारीरिक दर्द को भी बढ़ा देता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Live Video

लाइव क्रिकट स्कोर

khabar india YouTube posterKhabar India YouTube

राशिफल