UGC Act: लखीमपुर खीरी जनपद के ग्राम पंचायत बल्लीपुर में राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जहाँ पूरे देश में मतदाता जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को वोट देने के लिए प्रेरित किया जा रहा था, वहीं बल्लीपुर के ग्रामीणों ने एकजुट होकर ‘मतदान बहिष्कार’ का शंखनाद कर दिया है। “हक चाहिए तो लड़ना सीखो, कदम-कदम पर अड़ना सीखो” के नारों के साथ ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे लोकतंत्र के इस महापर्व से दूरी बनाए रखेंगे।
मतदाता दिवस पर ली ‘विरोध की शपथ’
ग्राम पंचायत बल्लीपुर में एकत्र हुए सैकड़ों मतदाताओं ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सहित किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों का यह कड़ा रुख केंद्र और राज्य सरकार की कुछ नीतियों और कानूनों के प्रति उनके गहरे असंतोष को दर्शाता है। मतदाताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता। ग्रामीणों के आक्रोश का मुख्य केंद्र बिंदु SC/ST एक्ट में किए गए बदलाव और UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से संबंधित नई नीतियां हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन कानूनों को “काले कानून” की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि ये नीतियां समाज के एक बड़े वर्ग के हितों के खिलाफ हैं।
ग्रामीणों तर्क है कि कानून के वर्तमान स्वरूप से समाज में आपसी सद्भाव बिगड़ रहा है और इसका दुरुपयोग होने की संभावनाएं प्रबल हैं। शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे बदलाव और स्वायत्तता के नाम पर निजीकरण को बढ़ावा देने से गरीब मेधावी छात्रों का भविष्य संकट में है। शपथ लेते हुए ग्रामीणों ने कहा, “जब तक सरकार इन काले कानूनों को वापस नहीं लेती या इनमें जनहित में सुधार नहीं करती, तब तक हम ग्रामवासी सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार करेंगे।”
UGC Act: गांव में पसरा राजनीतिक सन्नाटा
बल्लीपुर के इस फैसले ने क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ दिया है। चुनाव के समय जो गांव नेताओं की चहल-पहल से गुलजार रहता था, वहां अब विरोध की तख्तियां और बैनर दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों की इस एकजुटता ने स्थानीय प्रशासन और खुफिया विभाग को भी सतर्क कर दिया है। मतदाता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर ‘मतदान न करने की शपथ’ लेना लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती और सरकार के लिए चेतावनी मानी जा रही है। सूचना मिलते ही तहसील और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। लोकतंत्र में मतदान की अनिवार्यता को समझाने के लिए जल्द ही अधिकारियों की एक टीम बल्लीपुर का दौरा कर सकती है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।
क्या होगा असर?
बल्लीपुर की यह चिंगारी आसपास की अन्य ग्राम पंचायतों में भी फैल सकती है। यदि ग्रामीणों ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो यह किसी भी पार्टी के वोट बैंक के लिए बड़ा झटका साबित होगा। फिलहाल, पूरे गांव ने एक सुर में “नो वोट फॉर ब्लैक लॉज़” (काले कानूनों के लिए कोई वोट नहीं) का नारा बुलंद कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या चुनाव से पहले सरकार इन ग्रामीणों की बात सुनती है या बल्लीपुर के पोलिंग बूथ इस बार सूने पड़े रहेंगे।
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