Unnao Case: मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और दोहरे मापदंडों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्नाव दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए उन्होंने इसे पीड़िता के लिए न्याय की जीत बताया। इसके साथ ही, उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की निंदा की, लेकिन साथ ही भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। रुचि वीरा ने लखनऊ में ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर भाजपा की नाराजगी को आड़े हाथों लेते हुए इसे जातिगत भेदभाव और राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण करार दिया।
जातिगत राजनीति पर तीखा प्रहार
सांसद रुचि वीरा ने उन्नाव कांड के दोषी कुलदीप सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि एक महिला होने के नाते वह इस निर्णय का हृदय से स्वागत करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का यह कदम समाज में महिलाओं के विश्वास को सुदृढ़ करेगा। वहीं, लखनऊ में ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर मचे घमासान पर उन्होंने भाजपा को घेरते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल की निष्पक्षता केवल कागजों तक सीमित है। रुचि वीरा ने तर्क दिया कि जब पूर्व में ठाकुर समाज की बड़ी सभाएं और बैठकें आयोजित की गई थीं, तब भाजपा नेतृत्व ने कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही कोई दंडात्मक निर्देश दिए।
लेकिन अब जब ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखने के लिए एकजुटता दिखाई, तो पार्टी इसे अनुशासनहीनता और जातिवाद का नाम दे रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि समाज और शासन के संचालन में ब्राह्मणों की भूमिका सदैव मार्गदर्शक की रही है, जिसे नजरअंदाज करना भाजपा को भारी पड़ेगा। सांसद ने बांग्लादेश के बहाने देश के भीतर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की समानता पर भी जोर दिया, और कहा कि अत्याचार चाहे कहीं भी हो, वह निंदनीय है।
Unnao Case: सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका
वहीं उन्नाव रेप मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई जमानत पर तत्काल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर कुलदीप सेंगर को नोटिस भी जारी किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर आज सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान चीफ जस्टिस ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर यह नियम होता है कि अगर कोई व्यक्ति जेल से बाहर आ चुका है, तो कोर्ट उसकी आजादी नहीं छीनती, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग है, क्योंकि कुलदीप सेंगर अभी एक अन्य मामले में जेल में बंद है। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने का आदेश दिया।
Report By: BP Upadhyay
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