UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में बसी चितबड़ागांव नगर पंचायत सनातन धर्म की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। यहां 50 हजार की आबादी में करीब 6 हजार मुसलमान सात पीढ़ियों से सनातनी जीवन जी रहे हैं। भगवान राम और सनातन की आस्था में डूबे ये लोग न सिर्फ मांस, मछली या अंडे का सेवन नहीं करते बल्कि बाजारों में इनकी बिक्री भी पूरी तरह प्रतिबंधित है। यहां तक कि किसी कसाई को जमीन खरीदने या बसने की अनुमति नहीं दी जाती।
नगर पंचायत 52 गांवों का समूह
बलिया मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित यह नगर पंचायत 52 गांवों का समूह है। बाहरी नजर में मुश्किल होता है यह फर्क लगाना कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान। जाति भले अलग हो लेकिन दिल और कर्म सनातनी हैं। चेयरमैन अमरजीत सिंह बताते हैं यह दुनिया की इकलौती ऐसी नगरी है जहां हिंदू-मुस्लिम स्वेच्छा से सनातन परंपराओं का पालन करते हैं। देशभर में धार्मिक स्थलों पर मांस बिक्री रोकने की मांग उठ रही है लेकिन यहां पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह प्रथा चली आ रही है बिना किसी कानूनी दबाव के।
UP News: गोल टोपी पहन रामभक्ति में लीन मुस्लिम
मुस्लिम समुदाय के लोग गोल टोपी पहनकर भी रामभक्ति में लीन रहते हैं। वे इसे सूफी संतों और धार्मिक एकता की नगरी मानते हैं। एक स्थानीय मुसलमान ने कहा हमारे पूर्वजों ने सनातन के सम्मान में यह संकल्प लिया था। हिंदू भाइयों को ठेस न पहुंचे इसलिए हम मांसाहार से परहेज करते हैं। आजादी के बाद भी यहां बाजार शाकाहारी ही रहे।इस परंपरा की जड़ें सात पीढ़ी पुरानी हैं जो आज भी अटूट हैं।
चेयरमैन अमरजीत सिंह ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर इस नगरी को अयोध्या की तर्ज पर धार्मिक पर्यटन स्थल विकसित करने की मांग की। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यहां आने का न्योता दिया। उनका कहना है सनातन धर्म की वैश्विक लोकप्रियता के दौर में चितबड़ागांव एकता का प्रतीक बनेगा। सरकारी सहयोग से मंदिरों घाटों और सांस्कृतिक केंद्रों का विकास हो तो लाखों यात्री यहां आएंगे।
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