Up News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार न्यायपालिका को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस कदम को लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक बताया।
तबादले को बताया दबाव की राजनीति
पवन खेड़ा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 14 न्यायिक अधिकारियों के तबादले में संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर का नाम भी शामिल है, जिन्हें अब सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर तैनात किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह तबादला उस आदेश के बाद हुआ, जिसमें सीजेएम ने नवंबर 2024 की हिंसा के मामले में एक सीओ और एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। खेड़ा के मुताबिक, आदेश के बाद जज को हटाया जाना संदेह पैदा करता है।
Up News: पुराने मामलों का हवाला
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं है जब फैसलों को प्रभावित करने के लिए जजों का तबादला किया गया हो। उन्होंने गुजरात दंगों, बाबू बजरंगी, माया कोडनानी और दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी जजों को बदले जाने के आरोप लगते रहे हैं। उनके अनुसार, यह एक “खतरनाक मॉडल” है, जो लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है।
वकीलों के साथ खड़ी कांग्रेस
पवन खेड़ा ने कहा कि संभल में वकीलों का विरोध इस बात का संकेत है कि कानूनी समुदाय भी इस तबादले से असंतुष्ट है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए वकीलों और आम जनता के साथ खड़ी रहेगी।







