UP News: उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्रा के तबादले के बाद आयोजित विदाई समारोह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह एक अधिकारी और जनता के बीच बने गहरे रिश्ते का जीवंत प्रमाण बन गया।
इस बार माहौल कुछ अलग
आमतौर पर ट्रांसफर प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जहां अधिकारी आते हैं और चले जाते हैं। लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था। जैसे ही विदाई का समय आया, पुलिसकर्मियों से लेकर आम नागरिकों तक, हर किसी की आंखें नम हो गईं। वहां मौजूद लोग अपने पसंदीदा अफसर को विदा करने के लिए उमड़ पड़े। दरअसल, हाल ही में प्रदेश में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत मुरादाबाद मंडल के रामपुर और अमरोहा समेत 13 जिलों में पुलिस कप्तानों सहित 27 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए। इसी क्रम में एसपी विद्यासागर मिश्रा को सीतापुर स्थित 11वीं वाहिनी पीएसी का सेनानायक नियुक्त किया गया है।
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विदाई समारोह के दौरान जो दृश्य सामने आया, वह बेहद मार्मिक था। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जैसे ही मिश्रा मंच पर पहुंचे, तालियों की गूंज के बीच कई आंखें छलक उठीं। साथी पुलिसकर्मी, जूनियर अधिकारी और कर्मचारी—सभी अपने-अपने अंदाज में उन्हें यादगार विदाई देने में जुटे थे। कई पुलिसकर्मी भावुक होकर उनसे गले मिले, तो कुछ ने नम आंखों से उन्हें सलाम किया। सबसे भावुक पल तब आया, जब खुद एसपी मिश्रा अपने जज्बातों को रोक नहीं सके। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी खुद को संभाल नहीं पाए। यह दृश्य साफ तौर पर दिखा रहा था कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सिर्फ एक अफसर की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई।
रामपुर के कप्तान विद्यासागर मिश्रा जी ट्रांसफर सीतापुर जिले की PAC में हो गया अब कप्तान साहब का विदाई कार्यक्रम रखा गया कप्तान साहब के भाषण ने सबको एसे भावुक कर दिया की सभी महिला कांस्टेबल फूट फूटकर रोने लगी।
कप्तान साहब अच्छे बहुत अच्छे होंगे इसमें कोई शक नहीं करते हम लेकिन… pic.twitter.com/R0SWkofr3Z
— Shakti Singh/शक्ति सिंह (@singhshakti1982) April 2, 2026
काम करने के तरीके की काफी
स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यासागर मिश्रा की कार्यशैली बेहद सरल, संवेदनशील और न्यायप्रिय रही। उन्होंने हर वर्ग के लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनका समाधान करने की कोशिश की। यही वजह रही कि उनकी लोकप्रियता हर समुदाय में देखने को मिली। खास बात यह रही कि उन्होंने कानून-व्यवस्था को सख्ती से संभालते हुए भी मानवीय दृष्टिकोण को हमेशा प्राथमिकता दी। पुलिस विभाग के भीतर भी उनके काम करने के तरीके की काफी सराहना होती रही। सहयोगियों के साथ उनका व्यवहार सौम्य और प्रेरणादायक रहा, जिससे टीम भावना मजबूत हुई। उनके नेतृत्व में कई अहम मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया, जिससे जिले में कानून व्यवस्था बेहतर बनी रही।
रामपुर की यह विदाई सिर्फ एक तबादले का किस्सा नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास, सम्मान और अपनत्व की कहानी है, जो एक अधिकारी और जनता के बीच बनता है और जिसे शब्दों में पूरी तरह बयान करना आसान नहीं होता। जब एक अफसर के जाने पर पूरा शहर भावुक हो जाए, तो यह साफ संकेत होता है कि उसने अपने कर्तव्यों से कहीं बढ़कर लोगों के दिलों को छुआ है। विद्यासागर मिश्रा की यह विदाई आने वाले समय में एक मिसाल के तौर पर याद की जाएगी।
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