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UP NEWS: “6 मामलों में सजा, 50 महीने जेल अब कैदी नंबर 425 बने आजम; रामपुर में उठी आवाज – योगी रहम करें!”

UP NEWS: 17 नवंबर 2025 को MP-MLA कोर्ट में सजा सुनाए जाने के बाद यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को पुलिस रामपुर जेल लेकर पहुंची। जेल के मुख्य द्वार पर उतरे आजम के हाथ में चश्मे का केस और बिस्किट के पैकेट थे। मीडिया ने जब फर्जी पैन कार्ड मामले में सजा पर सवाल पूछा तो उन्होंने बस इतना कहा “बेहतर है। कोर्ट ने गुनहगार समझा, तो सजा सुनाई है।” पिछले पांच वर्षों में 50 महीने जेल में बिता चुके आजम के लिए यह सिलसिला अब आम हो गया है। स्थानीय लोग भी कहते हैं कि उनके फिर जेल जाने पर हैरानी नहीं होती, लेकिन कई लोग यह भी मानते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उन पर नरमी दिखानी चाहिए।

छह साल की जांच और दो पैन कार्ड की कहानी

यह मामला 2019 में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की FIR से शुरू हुआ। आरोप था कि अब्दुल्ला ने दो जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए एक में जन्म तारीख 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990। असली जन्मतिथि के हिसाब से वे 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए 25 वर्ष पूरे नहीं करते थे। आरोप है कि 2017 में अखिलेश सरकार में मंत्री रहे आजम खान ने रसूख के बल पर लखनऊ नगर निगम से फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाए और बेटे को चुनाव लड़वाया। अदालत ने इसे धोखाधड़ी और साजिश मानते हुए दोनों को 7 साल की सजा सुनाई।

UP NEWS: बीजेपी विधायक का आरोप ‘सत्ता में रहते मनमानी की’

आकाश सक्सेना का कहना है कि सपा सरकार में शिकायतों को दबा दिया गया था, इसलिए RTI के जरिए सबूत जुटाने पड़े। उनके अनुसार, “आजम ने सत्ता में रहते कई गलतियां कीं। जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन कब्जाना हो या बेटे के लिए दस्तावेज फर्जी बनाना अंजाम जेल ही होना था।”

UP NEWS: समर्थकों की राय बंटी-कभी गरीबों के नेता, कभी दोषी

रामपुर में आजम के समर्थकों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ का कहना है कि 75 वर्ष की उम्र में उन्हें राहत मिलनी चाहिए और अखिलेश यादव ने कठिन समय में उनका साथ छोड़ दिया। वहीं कुछ लोग उन्हें मिली सजा को सही ठहराते हुए कहते हैं कि उनके फैसलों ने स्थानीय लोगों को नुकसान पहुंचाया, चीनी मिल बंद हुई और बेरोजगारी बढ़ी।

परिवार पर छाया सियासी भविष्य का संकट

आजम और अब्दुल्ला 2027 तक चुनाव नहीं लड़ सकते। पहले भी भड़काऊ भाषण के केस में दोनों की विधायकी जा चुकी है। परिवार के अन्य सदस्य भी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट विवेक गुप्ता का कहना है कि “आजम कभी योगी के लिए चुनौती नहीं रहे। उनकी राजनीति अब ढलान पर है और परिवार का भविष्य भी अनिश्चित दिख रहा है।” लगातार सजा, कानूनी लड़ाइयों और बढ़ती उम्र के चलते आजम खान और उनके परिवार का सियासी भविष्य गहरे संकट में है।

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