Uttarakhand news: उत्तराखंड में 27 जनवरी को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हुए एक साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि यूसीसी लागू होने के बाद बीते एक साल में विभिन्न सेवाओं के लिए पांच लाख से अधिक आवेदन किए गए, लेकिन निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह साबित करता है कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर अपने संकल्प पर पूरी तरह खरी उतरी है। यूसीसी के तहत पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन और फेसलेस है, जिससे किसी भी आवेदक की पहचान सार्वजनिक होने का खतरा नहीं रहता।
यूसीसी से खत्म हुई निजता उल्लंघन की आशंका
सीएम धामी ने बताया कि लगभग सभी आवेदन यूसीसी पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे हैं। लोग घर बैठे ही विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन पंजीकरण और लिव-इन संबंध समाप्त करने जैसी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी भी सरकारी दफ्तर जाने या अधिकारी के सामने पेश होने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। यहां तक कि आवेदन एक बार सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत हो जाने के बाद, संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी नहीं देख सकता।
Uttarakhand news: निजी जानकारी पर सिर्फ आवेदक का अधिकार
यूसीसी पोर्टल पर अपलोड की गई निजी जानकारी तक केवल आवेदक की ही पहुंच होती है, वह भी तय वैरिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए। यही वजह है कि पिछले एक साल में निजता उल्लंघन से जुड़ी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई। इसके साथ ही औसतन पांच दिन में प्रमाणपत्र मिलने से लोगों का समय भी बच रहा है।
यूसीसी क्रियान्वयन ने आलोचकों को दिया जवाब
Uttarakhand news: मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर शुरुआत में कुछ लोगों ने नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन एक साल के सफल क्रियान्वयन ने उन सभी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है। यूसीसी न सिर्फ नागरिकों की निजता की रक्षा कर रही है, बल्कि इसकी सरल और पारदर्शी प्रक्रिया गुड गवर्नेंस का बेहतरीन उदाहरण भी बनकर सामने आई है।
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