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‘वंदे मातरम’ को बंगाल चुनाव से जोड़कर देखने वालों को अमित शाह ने दिया मुंह तोड़ जवाब !

Vande Mataram Debate

Vande Mataram Debate: संसद के शीतकालीन सत्र में आज मंगलवार को राज्यसभा में वंदे मातरम पर विशेष चर्चा शुरू हुई। इसकी शुरुआत करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की आजादी, राष्ट्रीय चेतना और मां भारती के प्रति समर्पण का शक्तिशाली मंत्र है। उन्होंने कहा कि इस विषय को किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह भारत के गौरव और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा है।

अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम ने आजादी की लड़ाई में ऐसा जोश भरा कि यह नारा देशभर में स्वतंत्रता का उद्घोष बन गया। कुछ लोग इस चर्चा पर सवाल उठा रहे हैं। जिन्हें समझ नहीं आ रहा कि वंदे मातरम पर चर्चा क्यों हो रही है, उन्हें अपनी समझ पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान था और जब 2047 में भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा होगा, तब भी वंदे मातरम की भावना उतनी ही मजबूत रहेगी। सदन में जानकारी दी गई कि 7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना वंदे मातरम पहली बार सार्वजनिक हुई थी। शुरू में इसे एक बेहतरीन साहित्यिक रचना माना गया, लेकिन धीरे-धीरे यह देशभक्ति का प्रतीक बनकर आजादी के आंदोलन की पहचान बन गई। बंकिमचंद्र की इस रचना ने उस दौर में देश को चेतना और साहस दिया।

वंदे मातरम को बंगाल चुनाव से जोड़कर देखना गलत

शाह ने कहा कि वंदे मातरम ने देश को जागरूक किया, युवाओं को प्रेरित किया और शहीदों के लिए यह अंतिम मंत्र बना, जिसने उन्हें अगला जन्म भी इसी भारत भूमि पर लेने की प्रेरणा दी। सदन में अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम भारत के पुनर्जागरण का मंत्र है। यह गीत मां भारती की वंदना है, भक्ति है और राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्य का स्मरण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को बंगाल चुनाव से जोड़कर देखना गलत है। यह गीत बंगाल ही नहीं, पूरे देश की धड़कन है और दुनियाभर में भारत की पहचान है। इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा था कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था।

Vande Mataram Debate: वंदे मातरम् के टुकड़े करने का काम कांग्रेस ने किया 

अमित शाह ने आगे कहा कि जिस गान को गांधी ने राष्ट्र की शुद्धतम आत्मा से जुड़ा गीत कहा, वो वंदे मातरम् का टुकड़ा करने का काम कांग्रेस ने किया। वंदे मातरम् ने आजादी के आंदोलन को गति दी। श्यामजी कृष्ण वर्मा, मैडम भीखाजी कामा और वीर सावरकर ने भारत का त्रिवर्ण ध्वज निर्मित किया था, उस पर भी स्वर्णिम अक्षर में एक ही नाम लिखा था- वंदे मातरम्। भारतीय जनता पार्टी का एक भी सदस्य वंदे मातरम् गान के समय सम्मान के साथ खड़ा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। कांग्रेस के जिस-जिस सांसद ने वंदे मातरम् नहीं गाने पर बयान दिया। सदन से बाहर चले गए, मैं इसकी लिस्ट आज शाम तक सदन के पटल पर रख दूंगा। इस सदन के चर्चा के रिकॉर्ड में रहना चाहिए कि कांग्रेस के सांसद वंदे मातरम् का विरोध करते हैं बंकिम चंद्र की 130वीं जयंती पर हमारी सरकार ने एक स्टांप जारी किया। आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर हर घर तिरंगा अभियान भी हमने शुरू किया। और आह्वान किया था तिरंगा फहराते वक्त वंदे मातरम् का कहना भूलना नहीं है।

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