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वंदे मातरम पर मुस्लिम लीग का भड़काऊ बयान कहा- ‘देश के मुसलमानों को हिन्दू बनाने की तैयारी’

Vande Mataram

Vande Mataram: राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को अनिवार्य किए जाने को लेकर देश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर जहां जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया है, वहीं अब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के फैसलों से धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है वंदेमातरम

मुस्लिम लीग के नेता मौलाना कौसर हयात खान ने बयान जारी कर कहा कि वंदेमातरम को अनिवार्य करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, पार्टी लंबे समय से इस गीत के कुछ अंशों पर आपत्ति जताती रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग को इसमें ऐसी पंक्तियां दिखाई देती हैं जिन्हें वे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं मानते। उन्होंने आरोप लगाया कि “देश के मुसलमानों पर एक खास सांस्कृतिक विचारधारा थोपने की कोशिश की जा रही है।” उनका कहना था कि किसी भी नागरिक को उसकी इच्छा और आस्था के विरुद्ध किसी चीज़ को मानने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

जबरदस्ती थोपना सही नहीं

मौलाना कौसर हयात खान ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और बहुलतावादी देश है, जहां सभी धर्मों और समुदायों को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई समुदाय किसी विशेष परंपरा या प्रतीक को अपनी धार्मिक दृष्टि से स्वीकार नहीं करता, तो उसे अनिवार्य कैसे किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि “आप किसी जमीन, नदी या प्रतीक को माता मानते हैं तो यह आपकी आस्था है, लेकिन उसे दूसरों पर थोपना उचित नहीं है।” उनका दावा है कि इस प्रकार की अनिवार्यता सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

आपको बता दें कि वंदेमातरम को लेकर विवाद नया नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से ही कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसके कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी। समय-समय पर इस विषय पर बहस होती रही है, हालांकि देश के अधिकांश हिस्सों में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान दिया जाता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और संवाद की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या सामाजिक तनाव की स्थिति से बचा जा सके।

Report By: BP Upadhyay

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