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उज्जैन में विक्रमोत्सव का आगाज़: शिवरात्रि से ‘शिवोहम’ तक सांस्कृतिक वैभव

उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में मनाया जा रहा एक भव्य आयोजन है। इसमें शिवरात्रि मेलों से लेकर नाट्य प्रस्तुतियां, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कवि सम्मेलन और पौराणिक फिल्म महोत्सव जैसे विविध कार्यक्रम शामिल हैं। यह उत्सव भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
आस्था और संस्कृति का संगम

Vikramotsav ujjain festival:  मध्य प्रदेश के पवित्र शहर उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में आयोजित होने वाला भव्य आयोजन ‘विक्रमोत्सव’ रविवार से शुरू हो रहा है। यह महोत्सव एक महीने से अधिक समय तक चलेगा और इसका समापन 19 मार्च को होगा। इस दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और व्यापारिक गतिविधियों की एक लंबी श्रृंखला देखने को मिलेगी।

सरकार ने विक्रमोत्सव कार्यक्रम घोषित किया

इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद विक्रमोत्सव का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक किया था। सरकार का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व, उनके योगदान और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को लोगों तक पहुंचाना है।

आस्था और संस्कृति का संगम
आस्था और संस्कृति का संगम

विक्रमोत्सव की शुरुआत रविवार को शिवरात्रि मेलों, कलश यात्रा और प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘शिवोहम’ संगीतमय कार्यक्रम से होगी। इसके साथ ही विक्रम थिएटर महोत्सव के अंतर्गत 16 से 25 फरवरी के बीच देश और विदेश के नाट्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिससे रंगमंच प्रेमियों को विविध अनुभव मिलेगा।

Vikramotsav ujjain festival: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और कठपुतली महोत्सव

इसके बाद 26 से 28 फरवरी तक अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली महोत्सव और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। वहीं 28 फरवरी से 1 मार्च के बीच सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल में न्याय व्यवस्था पर केंद्रित एक बौद्धिक सम्मेलन होगा। 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को जोड़ेंगे।

इस मेगा इवेंट में कई अन्य खास कार्यक्रम भी शामिल हैं। इनमें 20 से अधिक देशों की भागीदारी वाला पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, वेद अंताक्षरी और गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट तथा दत्त अखाड़ा में होने वाली सूर्योदय पूजा प्रमुख हैं।

Vikramotsav ujjain festival: आस्था और संस्कृति का संगम
आस्था और संस्कृति का संगम

सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार और पंचांग विमोचन

19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा और सृष्टि आरंभ दिवस के अवसर पर उज्जयिनी गौरव दिवस मनाया जाएगा। इस दिन मुख्य कार्यक्रम शिप्रा नदी के तट पर आयोजित होगा। इसमें सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार का वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन, ‘अर्शा भारत’ का दूसरा संस्करण और नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘महादेव की नदी कथा’ शामिल होगी।

कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि विक्रमोत्सव में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और व्यक्तित्व के हर पहलू को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को विक्रमादित्य के योगदान से परिचित कराना बेहद जरूरी है।

शिक्षा संस्थानों में विज्ञान कार्यक्रम शामिल

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को भी इस आयोजन से जोड़ा जाए, ताकि सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक और बौद्धिक पक्ष को उजागर करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें। इससे युवाओं को इतिहास, विज्ञान और संस्कृति के बीच गहरा संबंध समझने का अवसर मिलेगा।

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